पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची पुनरीक्षण पर CJI सूर्यकांत का बयान
'लगता है अलग बेंच गठित करना ही होगा', बंगाल SIR मामले में बोले CJI सूर्यकांत
Aaj Tak
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पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) मामले में सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि इस पर एक अलग बेंच गठित करने की आवश्यकता हो सकती है। टीएमसी सांसद मेनका गुरुस्वामी ने नए वोटरों के जोड़ने में फॉर्म-6 के दुरुपयोग का आरोप लगाया है।
- 01सुप्रीम कोर्ट में पश्चिम बंगाल के मतदाता सूची पुनरीक्षण का मामला पहुंचा।
- 02टीएमसी सांसद मेनका गुरुस्वामी ने नए वोटरों को जोड़ने में फॉर्म-6 के दुरुपयोग का आरोप लगाया।
- 03CJI सूर्यकांत ने अलग बेंच गठित करने की संभावना जताई।
- 04मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी चुनाव आयोग को पत्र लिखकर आरोप लगाए।
- 05सुप्रीम कोर्ट ने SIR प्रक्रिया में किसी भी बाधा को बर्दाश्त न करने की बात कही।
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पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से संबंधित मामले में सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। टीएमसी की राज्यसभा सांसद मेनका गुरुस्वामी ने कोर्ट में दावा किया कि राज्य में 5 से 7 लाख नए वोटरों को फॉर्म-6 के जरिए जोड़ा गया है। उन्होंने इस पर कोर्ट के हस्तक्षेप की मांग की और फॉर्म-6 के बड़े पैमाने पर उपयोग पर सवाल उठाया। चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने इस मुद्दे की गंभीरता को देखते हुए कहा कि एक अलग बेंच गठित करने की आवश्यकता हो सकती है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पहले औपचारिक याचिका दाखिल की जानी चाहिए। इस बीच, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त को पत्र लिखकर फॉर्म-6 के दुरुपयोग और बाहरी लोगों को फर्जी मतदाता के रूप में जोड़ने के आरोप लगाए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही स्पष्ट किया है कि SIR प्रक्रिया में किसी भी तरह की बाधा बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
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यदि सुप्रीम कोर्ट ने अलग बेंच गठित की, तो यह पश्चिम बंगाल में चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची के पुनरीक्षण पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकता है।
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