जस्टिस सुभाष विद्यार्थी ने राहुल गांधी केस से खुद को अलग किया, जानें कारण
राहुल गांधी केस की सुनवाई से खुद को अलग करने वाले जस्टिस सुभाष विद्यार्थी कौन है? कोर्ट में क्यों बोले- 'मेरे साथ गलत बर्ताव हुआ'
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इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस सुभाष विद्यार्थी ने राहुल गांधी की नागरिकता से संबंधित मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया है। यह निर्णय तब लिया गया जब याचिकाकर्ता एस. विग्नेश शिशिर ने सोशल मीडिया पर जज के खिलाफ विवादित टिप्पणियां कीं। जस्टिस विद्यार्थी ने कहा कि उनके साथ गलत बर्ताव हुआ है।
- 01जस्टिस सुभाष विद्यार्थी ने राहुल गांधी की नागरिकता के मामले से खुद को अलग किया।
- 02सोशल मीडिया पर याचिकाकर्ता की टिप्पणियों ने विवाद को जन्म दिया।
- 03जस्टिस विद्यार्थी ने कहा कि उनके साथ गलत बर्ताव हुआ।
- 04याचिका में राहुल गांधी पर ब्रिटिश नागरिकता का आरोप लगाया गया है।
- 05जस्टिस विद्यार्थी 2023 में स्थायी जज बने थे।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस सुभाष विद्यार्थी ने राहुल गांधी की ‘दोहरी नागरिकता’ से संबंधित मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया है। यह निर्णय तब लिया गया जब याचिकाकर्ता एस. विग्नेश शिशिर और जज के बीच तीखी बहस हुई। जस्टिस विद्यार्थी ने कहा कि उनके साथ गलत बर्ताव हुआ है और याचिकाकर्ता द्वारा की गई सोशल मीडिया टिप्पणियां स्वीकार्य नहीं हैं। जस्टिस विद्यार्थी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए केस की फाइल को चीफ जस्टिस के पास भेजने का निर्देश दिया। याचिकाकर्ता ने सोशल मीडिया पर जज के खिलाफ मोर्चा खोला और गंभीर आरोप लगाए। जस्टिस विद्यार्थी का जन्म 30 अप्रैल 1970 को हुआ था और उन्होंने 1993 में लखनऊ विश्वविद्यालय से कानून की डिग्री हासिल की। वे 2021 में एडिशनल जज बने और 2023 में स्थायी जज बने। यह मामला कर्नाटक के निवासी एस. विग्नेश शिशिर द्वारा दायर किया गया है, जिसमें राहुल गांधी पर ब्रिटिश नागरिकता का आरोप लगाया गया है।
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इस मामले की सुनवाई से जुड़े विवाद ने न्यायपालिका की स्वतंत्रता और निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं।
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