सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एमएम सुंदरेश ने सीजेआई सूर्यकांत की कार्यशैली का किया खुलासा
CJI बनना आसान नहीं, सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एमएम सुंदरेश ने बताई सीजेआई सूर्यकांत की दिनचर्या
Nbt NavbharattimesImage: Nbt Navbharattimes
भारत के चीफ जस्टिस (CJI) सूर्यकांत की कार्यशैली पर सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एमएम सुंदरेश ने बताया कि उन्हें हर दिन 17 से 18 घंटे काम करना पड़ता है। मदुरै में एक कार्यक्रम में जस्टिस सुंदरेश ने न्यायपालिका और जिला अदालतों के महत्व पर भी जोर दिया।
- 01सीजेआई सूर्यकांत को हर दिन 17 से 18 घंटे काम करना पड़ता है।
- 02जिला अदालतें आम नागरिकों के लिए कानून का पहला सामना होती हैं।
- 03अदालतों का इंफ्रास्ट्रक्चर न्याय की गुणवत्ता को प्रभावित करता है।
- 04सीजेआई ने जजों के काम की परिस्थितियों में सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया।
- 05न्यायपालिका की भूमिका को समझना आवश्यक है।
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नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में, सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एमएम सुंदरेश ने बताया कि भारत के चीफ जस्टिस (CJI) सूर्यकांत को हर दिन 17 से 18 घंटे काम करना पड़ता है। मदुरै में जिला अदालत की नई इमारत और मद्रास हाई कोर्ट के मदुरै बेंच के गेस्ट हाउस के उद्घाटन के दौरान, जस्टिस सुंदरेश ने सीजेआई की कार्यशैली और न्यायपालिका की भूमिका पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि जिला अदालतें आम नागरिकों के लिए कानून का पहला सामना होती हैं और इनकी भौतिक नजदीकी का न्याय पर बड़ा प्रभाव पड़ता है। सीजेआई सूर्यकांत ने अदालतों के इंफ्रास्ट्रक्चर को भी न्याय की गुणवत्ता से जोड़ा और कहा कि अच्छे कोर्टरूम डिज़ाइन से अनुशासन और कुशलता में सुधार होता है। उन्होंने जजों और न्यायिक अधिकारियों के लिए काम की परिस्थितियों में सुधार की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
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जिला अदालतों की भूमिका को समझने से आम नागरिकों को न्याय प्राप्त करने में मदद मिलेगी।
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