बिहार विधान परिषद चुनाव: तेजस्वी यादव और उपेंद्र कुशवाहा की राजनीतिक चुनौती
Bihar MLC Election: 'एक अनार सौ बीमार' के फेर में तेजस्वी यादव, क्या 'टेढ़ी चाल' चलने जा रहे उपेंद्र कुशवाहा? खामोशी से सियासी सस्पेंस

Image: News 18 Hindi
बिहार विधान परिषद की 9 सीटों के चुनाव 18 जून को होंगे, जिसमें तेजस्वी यादव को एक उम्मीदवार चुनने में चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। उपेंद्र कुशवाहा की चुप्पी भी सियासी सस्पेंस पैदा कर रही है।
- 01बिहार विधान परिषद के चुनाव 18 जून को होंगे, नामांकन की अंतिम तिथि 8 जून है।
- 02NDA ने चार-चार उम्मीदवार बीजेपी और जेडीयू से घोषित किए हैं, जबकि चिराग पासवान की पार्टी ने भी अपने उम्मीदवारों का ऐलान किया है।
- 03तेजस्वी यादव को एक उम्मीदवार चुनने में सामाजिक समीकरण साधने का दबाव है, जिसमें अल्पसंख्यक, सवर्ण और अति पिछड़ा वर्ग के नेता शामिल हैं।
- 04राजद के पास केवल 25 विधायक हैं, जिससे उन्हें एक सीट जीतने के लिए सहयोगी दलों का समर्थन चाहिए।
- 05उपेंद्र कुशवाहा की चुप्पी और उनकी राजनीतिक स्थिति पर भी सस्पेंस बना हुआ है।
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बिहार विधान परिषद की 9 सीटों के द्विवार्षिक चुनाव 18 जून को होने जा रहे हैं, जिसमें नामांकन की अंतिम तिथि 8 जून है। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है, जिसमें बीजेपी और जेडीयू ने चार-चार उम्मीदवार उतारे हैं। मौजूदा संख्या बल के अनुसार, NDA को 9 में से 8 या 9 सीटें मिलने की संभावना है। अब विपक्षी खेमे की ओर से तेजस्वी यादव को एक ऐसे उम्मीदवार का चयन करना है जो सहयोगी दलों को भी स्वीकार्य हो। राजद के पास केवल 25 विधायक हैं, जिससे उन्हें कांग्रेस और एआईएमआईएम के समर्थन की आवश्यकता होगी। इस एक सीट के लिए रोहिणी आचार्य और सुनील सिंह जैसे हाई-प्रोफाइल दावेदारों के बीच संतुलन बनाना तेजस्वी के लिए चुनौती है। वहीं, उपेंद्र कुशवाहा की चुप्पी भी सियासी कयासों को जन्म दे रही है।
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बिहार विधान परिषद चुनाव का परिणाम राज्य की राजनीति में महत्वपूर्ण बदलाव ला सकता है।
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