धार के भोजशाला में अष्टधातु की वाग्देवी प्रतिमा के सामने पहली महाआरती
भोजशाला में पहली बार अष्टधातु की वाग्देवी प्रतिमा के सामने महाआरती, धार प्रशासन ने तुरंत हटाकर मंदिर में रखवाई
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धार, मध्य प्रदेश में भोजशाला में पहली बार अष्टधातु की वाग्देवी प्रतिमा के समक्ष महाआरती का आयोजन किया गया। प्रशासन ने इसे ASI के नियमों के तहत हटाकर ज्योति मंदिर में रखा। यह घटना धार्मिक आस्था और ऐतिहासिक संरक्षण के बीच संतुलन की चर्चा को जन्म देती है।
- 01भोजशाला में पहली बार अष्टधातु की वाग्देवी प्रतिमा के समक्ष महाआरती आयोजित की गई।
- 02प्रशासन ने प्रतिमा को ASI के नियमों के तहत हटाकर ज्योति मंदिर में रखा।
- 03भोजशाला को हिंदू समाज द्वारा मां वाग्देवी का प्राचीन मंदिर माना जाता है।
- 04मां वाग्देवी की मूल प्रतिमा 1902 में लंदन ले जाई गई थी और वर्तमान में ब्रिटिश म्यूजियम में है।
- 05भोजशाला का नाम परमार शासक राजा भोज से जुड़ा है, जो सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है।
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धार, मध्य प्रदेश में भोजशाला में शनिवार को पहली बार अष्टधातु से निर्मित वाग्देवी की प्रतिमा के समक्ष विशेष पूजन और महाआरती का आयोजन किया गया। अब तक यहां एक्रेलिक प्रतिमा का उपयोग होता था। इस विशेष अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे। हालांकि, प्रशासन ने ASI के नियमों के तहत प्रतिमा को वहां से हटाकर मोतीबाग चौक स्थित ज्योति मंदिर में सुरक्षित रखा। यह घटना भोजशाला को लेकर चल रही धार्मिक और ऐतिहासिक बहस को फिर से जीवित कर देती है। हिंदू समाज इस स्थल को मां वाग्देवी का प्राचीन मंदिर मानता है, जबकि यह लंबे समय से कानूनी विमर्श का विषय भी रहा है। प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई संरक्षित स्मारकों से संबंधित प्रावधानों के तहत की गई। इस घटनाक्रम ने धार्मिक आस्था और पुरातात्विक संरक्षण के बीच संतुलन की चर्चा को जन्म दिया है।
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भोजशाला में अष्टधातु की प्रतिमा के समक्ष पूजा का आयोजन धार्मिक आस्था को पुनर्जीवित करता है।
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