बिहार MLC चुनाव में दलितों की अनदेखी, NDA और लोजपा ने नहीं दिए टिकट
नीतीश के सामाजिक न्याय में दलित कोई फैक्टर नहीं? लोजपा रामविलास ने भी नहीं जलाया 'मतलब का चिराग'
Image: Nbt Navbharattimes
बिहार में MLC चुनाव के लिए NDA ने दलितों को नजरअंदाज किया है। जनता दल (यू) और भारतीय जनता पार्टी ने दलितों के बजाय अन्य जातियों के उम्मीदवारों को प्राथमिकता दी है। लोजपा ने भी दलित उम्मीदवार नहीं चुने, जिससे दलित राजनीति को बड़ा झटका लगा है।
- 01NDA ने MLC चुनाव में दलितों के लिए कोई टिकट नहीं दिया।
- 02जनता दल (यू) ने एक भी दलित नेता को उम्मीदवार नहीं बनाया।
- 03भाजपा ने भी दलितों के प्रति उदासीनता दिखाई और अन्य जातियों के उम्मीदवारों को चुना।
- 04लोजपा के चिराग पासवान ने मुसलमान उम्मीदवार को प्राथमिकता दी।
- 05पिछले चुनाव में जदयू ने एक दलित नेता को MLC बनाया था, लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ।
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बिहार में MLC चुनाव के लिए NDA की रणनीति में दलितों को पूरी तरह से नजरअंदाज किया गया है। जनता दल (यू) ने अपने उम्मीदवारों में एक भी दलित नेता को शामिल नहीं किया, जबकि भारतीय जनता पार्टी ने भी दलितों के प्रति उदासीनता दिखाई है। भाजपा ने दो सवर्ण और दो अतिपिछड़ा जातियों के उम्मीदवारों की घोषणा की है। लोजपा के चिराग पासवान ने भी दलितों को नजरअंदाज करते हुए मुसलमान उम्मीदवार अशरफ अंसारी को प्राथमिकता दी। इससे स्पष्ट होता है कि दलित राजनीति को लेकर मौजूदा राजनीतिक दलों की सोच में बदलाव आया है। मार्च 2021 में, जदयू ने एक दलित नेता को MLC बनाया था, लेकिन अब दलितों की अनदेखी की जा रही है। यह स्थिति दलित समुदाय के लिए एक बड़ा झटका है और यह दर्शाता है कि सामाजिक न्याय के मुद्दे पर राजनीतिक दलों की प्राथमिकता क्या है।
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बिहार में दलित समुदाय की राजनीतिक स्थिति कमजोर हुई है।
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