भारत में जल संसाधन प्रबंधन के लिए इसरो और जल शक्ति मंत्रालय का समझौता
जल संसाधन के प्रबंधन के लिए सेटेलाइट से होगी जलाशयों की निगरानी, केंद्र सरकार और इसरो के बीच हुआ समझौता
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Image: Jagran
भारत में जल संसाधनों के प्रबंधन के लिए सेटेलाइट तकनीक का उपयोग बढ़ाने के उद्देश्य से जल शक्ति मंत्रालय और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। इस समझौते के तहत 24 अनुसंधान क्षेत्रों में सहयोग किया जाएगा।
- 01जल शक्ति मंत्रालय और इसरो ने जल संसाधन प्रबंधन के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं।
- 02प्रति परियोजना 20 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता दी जाएगी।
- 032047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए जल सुरक्षा महत्वपूर्ण है।
- 04जल संचय जन भागीदारी अभियान के तीसरे चरण का शुभारंभ किया गया है।
- 05भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था लगभग नौ अरब अमेरिकी डॉलर तक बढ़ गई है।
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जल शक्ति मंत्रालय और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने जल संसाधन प्रबंधन में सेटेलाइट तकनीक के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस समझौते के तहत जलाशय निगरानी, नदी-प्रवाह विश्लेषण, और जल गुणवत्ता आकलन सहित 24 अनुसंधान क्षेत्रों में सहयोग किया जाएगा। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने जल सुरक्षा को 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य के लिए महत्वपूर्ण बताया। इसके साथ ही, जल संचय जन भागीदारी (जेएसजेबी) अभियान के तीसरे चरण की शुरुआत की गई, जिसमें 2026 से 2027 के बीच दो करोड़ जल संरक्षण संरचनाओं के निर्माण का लक्ष्य रखा गया है। इसरो के अध्यक्ष वी. नारायणन ने कहा कि यह साझेदारी भूजल आकलन और बाढ़ पूर्वानुमान में मदद करेगी। विज्ञान एवं प्राद्यौगिकी मंत्री जितेंद्र सिंह ने भारत की बढ़ती अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था का उल्लेख किया, जो आने वाले वर्षों में और भी बढ़ने की उम्मीद है।
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जल संसाधनों के प्रबंधन में सेटेलाइट तकनीक के उपयोग से जल सुरक्षा में सुधार होगा।
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