ISRO की चंद्रयान-2 ने चांद पर पानी की बर्फ का बड़ा भंडार खोजा
नासा हाथ मलता रह गया और ISRO ने मार ली बाजी! चांद के उस खौफनाक गड्ढे के नीचे मिल गया 'स्पेस का पेट्रोल'

Image: News 18 Hindi
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने चंद्रयान-2 के माध्यम से चांद के फॉस्टिनी क्रेटर में पानी की बर्फ का विशाल भंडार खोज निकाला है। यह खोज भविष्य के चंद्र मिशनों के लिए महत्वपूर्ण है, जिससे चांद पर मानव बस्तियों की स्थापना में मदद मिलेगी।
- 01चंद्रयान-2 ने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के चार गड्ढों में पानी की बर्फ के संकेत खोजे हैं।
- 02फॉस्टिनी क्रेटर में 1.1 किलोमीटर का क्षेत्र पूरी तरह से सुरक्षित है, जहां बर्फ जमा हुई है।
- 03डुअल फ्रीक्वेंसी सिंथेटिक अपर्चर रडार (DFSAR) ने चंद्रमा की सतह के नीचे बर्फ की मौजूदगी का पता लगाया।
- 04इस खोज से चंद्रमा पर भविष्य के मिशनों के लिए लैंडिंग साइटों की पहचान में मदद मिलेगी।
- 05चांद पर मिले पानी का उपयोग रॉकेट ईंधन के रूप में भी किया जा सकता है।
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भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने चंद्रयान-2 के माध्यम से चांद के दक्षिणी ध्रुव पर स्थित फॉस्टिनी क्रेटर के नीचे पानी की बर्फ का एक बड़ा भंडार खोज निकाला है। यह खोज चंद्रमा के चार गड्ढों में की गई है, जहां हमेशा अंधेरा रहता है। ISRO के वैज्ञानिकों ने चंद्रयान-2 के डुअल फ्रीक्वेंसी सिंथेटिक अपर्चर रडार (DFSAR) का उपयोग करके इन गड्ढों की सतह के नीचे बर्फ की मौजूदगी के पुख्ता संकेत प्राप्त किए हैं। फॉस्टिनी क्रेटर में 1.1 किलोमीटर का एक ऐसा क्षेत्र मिला है, जो सूरज की रोशनी और रेडिएशन से सुरक्षित है। यह खोज भविष्य के चंद्र मिशनों के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे चांद पर मानव बस्तियों की स्थापना और स्थानीय संसाधनों के उपयोग की दिशा में महत्वपूर्ण जानकारी मिलेगी। इसके अलावा, चांद पर मिले पानी का उपयोग रॉकेट ईंधन के रूप में भी किया जा सकता है, जिससे अंतरिक्ष यात्रा को और अधिक संभव बनाया जा सकेगा।
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चांद पर पानी की बर्फ की खोज से भविष्य में मानव बस्तियों की स्थापना और अंतरिक्ष यात्रा को बढ़ावा मिलेगा।
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