ISRO का सैटेलाइट माओवादियों के छिपे खजाने की खोज में, 200 करोड़ का बारूद दबा
जंगल में माओवादियों के गुप्त खजाने को तलाश रहा ISRO का सैटेलाइट, जमीन के नीचे दबा है 200 करोड़ का बारूद

Image: Jagran
भारतीय सुरक्षा बलों ने 'ऑपरेशन खजाना' के तहत माओवादियों के छिपे हुए हथियारों और नकदी को खोजने के लिए ISRO के सैटेलाइट और ग्राउंड पेनेट्रेटिंग रडार का उपयोग किया है। अनुमान है कि माओवादियों ने 200 करोड़ रुपये से अधिक का बारूद और नकदी जमीन के नीचे दबा रखा है।
- 01ऑपरेशन खजाना के तहत माओवादियों के 200 करोड़ रुपये से अधिक के हथियार और नकदी को खोजा जा रहा है।
- 02इसरो के रिसैट-2बी सैटेलाइट का उपयोग संदिग्ध खोदाई और थर्मल सिग्नेचर के माध्यम से किया जा रहा है।
- 03पिछले तीन महीनों में सुरक्षा बलों ने आठ करोड़ रुपये से अधिक के हथियार और नकदी बरामद किए हैं।
- 04माओवादी अपनी अवैध वसूली का 50 प्रतिशत हिस्सा जमीन के नीचे छिपाते थे।
- 05सुरक्षा बलों का यह अभियान बस्तर में माओवादियों को जड़ से खत्म करने का संकेत देता है।
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भारतीय सुरक्षा बलों ने माओवादियों के नेटवर्क को खत्म करने के लिए 'ऑपरेशन खजाना' शुरू किया है, जिसमें ISRO के सैटेलाइट और ग्राउंड पेनेट्रेटिंग रडार जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है। इस अभियान का उद्देश्य माओवादियों द्वारा जमीन के नीचे छिपाए गए 200 करोड़ रुपये से अधिक के बारूद और नकदी को निकालना है। पिछले तीन महीनों में, सुरक्षा बलों ने इस ऑपरेशन के तहत आठ करोड़ रुपये से अधिक के अत्याधुनिक हथियार और नकदी बरामद किए हैं। इसरो का रिसैट-2बी सैटेलाइट घने जंगलों में छिपे स्थानों पर नजर रखने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है, जो संदिग्ध खोदाई और थर्मल सिग्नेचर के माध्यम से सटीक डंप लोकेशंस को ट्रेस कर रहा है। इसके अलावा, ड्रोन और बम निरोधक दस्ते भी इस अभियान में शामिल हैं। यह अभियान माओवादियों की डंप पॉलिसी को खत्म करने का प्रयास दर्शाता है, जिससे यह संकेत मिलता है कि बस्तर में माओवाद को जड़ से उखाड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
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इस अभियान का उद्देश्य बस्तर क्षेत्र में माओवादियों के प्रभाव को खत्म करना है, जिससे स्थानीय सुरक्षा और विकास में सुधार हो सकता है।
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