भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की आशंका, तेल कंपनियों को हो रहा भारी नुकसान
देश में बढ़ सकते हैं पेट्रोल-डीजल के दाम? तेल कंपनियों को हर महीने 30 हजार करोड़ का नुकसान
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वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण भारत की सरकारी तेल कंपनियों को हर महीने 30,000 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है। जबकि कई देशों में पेट्रोल-डीजल की कीमतें 30 प्रतिशत तक बढ़ चुकी हैं, भारत में कीमतें स्थिर हैं, लेकिन भविष्य में वृद्धि की संभावना जताई जा रही है।
- 01भारत की सरकारी तेल कंपनियों को हर महीने 30,000 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है।
- 02कच्चे तेल की कीमतें 70 डॉलर से बढ़कर 120 डॉलर प्रति बैरल हो गई हैं।
- 03पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतें भारत में क्रमशः 94.77 रुपये और 87.67 रुपये प्रति लीटर पर स्थिर हैं।
- 04मध्य पूर्व में युद्ध के कारण भारत के 40 प्रतिशत कच्चे तेल के आयात में रुकावट आई है।
- 05सरकार ने एक्साइज ड्यूटी में कटौती कर अंडर-रिकवरी को रोकने की कोशिश की है।
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ईरान और इजरायल-अमेरिका के बीच युद्ध के चलते वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ी हैं, जिससे भारत की सरकारी तेल कंपनियों को हर महीने 30,000 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है। वर्तमान में, भारत में पेट्रोल की कीमत 94.77 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत 87.67 रुपये प्रति लीटर पर स्थिर हैं। हालांकि, कई देशों में पेट्रोल-डीजल की कीमतें 30 प्रतिशत तक बढ़ गई हैं। भारत में, कच्चे तेल की कीमतें 70 डॉलर से बढ़कर 120 डॉलर प्रति बैरल हो गई हैं। पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने कहा कि भारत अपनी तेल जरूरतों का 88 प्रतिशत हिस्सा अंतरराष्ट्रीय बाजारों से पूरा करता है। यदि सरकार ने एक्साइज ड्यूटी में कटौती नहीं की होती, तो अंडर-रिकवरी बढ़कर 62,500 करोड़ रुपये हो जाती। इस स्थिति में, भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में वृद्धि की संभावना जताई जा रही है।
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यदि पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ती हैं, तो यह आम उपभोक्ताओं के लिए ईंधन की लागत को बढ़ा सकता है, जिससे यात्रा और परिवहन की लागत में वृद्धि होगी।
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