भारत में सरकारी तेल कंपनियों को हर महीने ₹30,000 करोड़ का घाटा
सरकारी तेल कंपनियों को ईंधन पर भारी घाटा, हर महीने ₹30000 करोड़ का नुकसान; क्या बढ़ेंगे पेट्रोल-डीजल के दाम?
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भारत की सरकारी तेल मार्केटिंग कंपनियों को मिडिल ईस्ट संकट के कारण हर महीने लगभग ₹30,000 करोड़ का नुकसान हो रहा है। पेट्रोल और डीजल की कीमतें स्थिर हैं, जबकि कंपनियां महंगे कच्चे तेल को कम कीमत पर बेच रही हैं। इससे कंपनियों की आर्थिक स्थिति पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।
- 01सरकारी तेल कंपनियों को हर महीने ₹30,000 करोड़ का नुकसान हो रहा है।
- 02पेट्रोल की बिक्री पर 'अंडर-रिकवरी' लगभग ₹20 प्रति लीटर है।
- 03डीजल पर 'अंडर-रिकवरी' लगभग ₹100 प्रति लीटर है।
- 04कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि के बावजूद भारत में रिटेल कीमतें स्थिर हैं।
- 05सरकारी तेल कंपनियों के शेयरों में 12-23% की गिरावट आई है।
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भारत की सरकारी तेल मार्केटिंग कंपनियों, जैसे इंडियन ऑयल, हिंदुस्तान पेट्रोलियम और भारत पेट्रोलियम, को मिडिल ईस्ट संकट के कारण हर महीने लगभग ₹30,000 करोड़ का नुकसान हो रहा है। केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने बताया कि ये कंपनियां महंगे कच्चे तेल को कम कीमत पर बेच रही हैं, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। पेट्रोल की बिक्री पर 'अंडर-रिकवरी' लगभग ₹20 प्रति लीटर और डीजल पर ₹100 प्रति लीटर है। इसके बावजूद, भारत में रिटेल कीमतें स्थिर हैं। कंपनियों ने प्रीमियम पेट्रोल और कमर्शियल LPG की कीमतों में वृद्धि की है ताकि रिटेल कीमतें अपरिवर्तित रह सकें। 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के बाद से इन कंपनियों के शेयरों में 12-23% की गिरावट आई है।
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यदि सरकारी तेल कंपनियों का घाटा बढ़ता है, तो पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि हो सकती है, जिससे आम जनता की परिवहन लागत बढ़ेगी।
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