गोल्डमैन सैक्स का भारतीय बाजार पर विश्लेषण: जोखिम कम, रिवॉर्ड सीमित
गोल्डमैन सैक्स की चेतावनी: भारतीय बाजार में 'रिस्क' के मुकाबले कम है 'रिवॉर्ड', मूल्यांकन बना चिंता
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गोल्डमैन सैक्स के विश्लेषकों ने भारतीय शेयर बाजार में जोखिम और रिवॉर्ड के अनुपात को कम आकर्षक बताया है, खासकर ऊंचे मूल्यांकन के कारण। विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली के चलते, एचयूएल, लार्सन ऐंड टुब्रो और बजाज ऑटो जैसी कंपनियों पर सकारात्मक नजरिया रखा गया है।
- 01भारतीय शेयर बाजार में जोखिम और रिवॉर्ड का अनुपात कम आकर्षक है।
- 02गोल्डमैन सैक्स ने 12 कंपनियों पर सकारात्मक नजरिया रखा है।
- 03विदेशी निवेशकों ने इस साल अब तक 22 अरब डॉलर की बिकवाली की है।
- 04एफआईआई की हिस्सेदारी 16 प्रतिशत पर आ गई है, जो 14 साल का सबसे निचला स्तर है।
- 05लार्जकैप कंपनियों में विदेशी हिस्सेदारी 10 साल के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है।
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गोल्डमैन सैक्स के विश्लेषकों ने भारतीय शेयर बाजार में 'जोखिम' और 'रिवॉर्ड' के अनुपात को उत्तर एशियाई बाजारों की तुलना में कम आकर्षक बताया है। टिमोथी मो और उनकी टीम का कहना है कि ऊंचे मूल्यांकन के कारण निवेशकों की चिंताएं बढ़ी हैं। उन्होंने सुझाव दिया है कि मध्यावधि निवेशकों को ऐसे शेयरों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए जिनमें विदेशी स्वामित्व कम है। गोल्डमैन सैक्स ने हिंदुस्तान यूनिलीवर (एचयूएल), लार्सन ऐंड टुब्रो, और बजाज ऑटो जैसी 12 कंपनियों पर सकारात्मक दृष्टिकोण व्यक्त किया है। इस वर्ष, विदेशी निवेशकों ने भारतीय इक्विटी में 22 अरब डॉलर की बिकवाली की है, जो पिछले 25 वर्षों में सबसे अधिक है। एफआईआई की हिस्सेदारी घटकर 16 प्रतिशत पर आ गई है, जबकि घरेलू संस्थानों की हिस्सेदारी बढ़कर 17 प्रतिशत हो गई है।
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विदेशी निवेशकों की बिकवाली के कारण भारतीय शेयर बाजार में निवेशकों की धारणा प्रभावित हो रही है, जिससे घरेलू निवेशकों को अधिक अवसर मिल सकते हैं।
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