भारत को 2050 तक 1800 गीगावॉट नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्य के लिए 'सुपर ग्रिड' की आवश्यकता: सारंगी
भारत को चीन जैसा 'सुपर ग्रिड' बनाने की जरूरत, तभी 1800 गीगावॉट का लक्ष्य हासिल होगा: सारंगी
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भारत के नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के सचिव संतोष कुमार सारंगी ने कहा है कि 2050 तक 1,800 गीगावॉट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता हासिल करने के लिए देश को चीन जैसी 'सुपर ग्रिड' योजना बनाने की आवश्यकता है। इसके लिए 2030 तक लगभग 574 अरब डॉलर खर्च करने की योजना है।
- 01भारत को 2050 तक 1,800 गीगावॉट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता हासिल करने के लिए 'सुपर ग्रिड' बनाने की आवश्यकता है।
- 022030 तक 'सुपर ग्रिड' के लिए 574 अरब डॉलर खर्च करने की योजना है।
- 03हाई-वोल्टेज डीसी और एचवीएसी लाइनें बिछाई जाएंगी।
- 04पेरोवस्काइट सोलर सेल से सोलर एनर्जी की दरें घटकर लगभग 1 रुपया प्रति यूनिट तक आ सकती हैं।
- 05नीतिगत स्थिरता के लिए लचीला दृष्टिकोण अपनाना जरूरी है।
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नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के सचिव संतोष कुमार सारंगी ने सीआईआई के वार्षिक व्यापार सम्मेलन 2026 में कहा कि भारत को 2050 तक 1,800 गीगावॉट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता हासिल करने के लिए चीन जैसी 'सुपर ग्रिड' योजना बनाने की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि इसके लिए 574 अरब डॉलर का निवेश किया जाएगा, जिससे नवीकरणीय ऊर्जा से समृद्ध क्षेत्रों से बिजली को लोड सेक्टर तक पहुंचाने के लिए हाई-वोल्टेज डीसी और एचवीएसी लाइनें बिछाई जाएंगी। सारंगी ने पेरोवस्काइट सोलर सेल के माध्यम से सोलर एनर्जी की दरों में कमी की संभावना का भी उल्लेख किया, जिससे दरें लगभग 1 रुपया प्रति यूनिट तक आ सकती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि नीतिगत स्थिरता के लिए एक लचीला दृष्टिकोण अपनाना जरूरी है, जिससे निवेशकों और डेवलपरों का भरोसा बढ़े।
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यदि भारत 'सुपर ग्रिड' योजना को सफलतापूर्वक लागू करता है, तो इससे नवीकरणीय ऊर्जा की उपलब्धता बढ़ेगी और बिजली की लागत में कमी आएगी।
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