दिल्ली के उपराज्यपाल संधू ने 'रीइमैजिनिंग दिल्ली' पर साझा जिम्मेदारी का दिया संदेश
दिल्ली के उपराज्यपाल संधू ने 'रीइमैजिनिंग दिल्ली' पर दिया जोर, बताया साझा जिम्मेदारी
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दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में 'रीइमैजिनिंग दिल्ली' कार्यक्रम में कहा कि दिल्ली केवल देश की राजधानी नहीं, बल्कि विविधता और आकांक्षाओं का प्रतीक है। उन्होंने सभी वर्गों से मिलकर शहर के विकास और पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता की जिम्मेदारी साझा करने की अपील की।
- 01दिल्ली की पहचान विविधता और आकांक्षाओं का प्रतीक है।
- 02शहरीकरण और पर्यावरणीय दबाव जैसी चुनौतियों का सामना करने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी हैं।
- 03शहर को विकसित करने की जिम्मेदारी केवल सरकार की नहीं, बल्कि समाज के हर वर्ग की है।
- 04जेएनयू में बिताए गए वर्षों ने उपराज्यपाल के विचारों को आकार दिया।
- 05कार्यक्रम में शिक्षकों, शोधार्थियों और छात्रों की बड़ी संख्या मौजूद थी।
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दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज में 'रीइमैजिनिंग दिल्ली' कार्यक्रम में भाग लेते हुए कहा कि दिल्ली सिर्फ देश की राजधानी नहीं है, बल्कि यह भारत की विविधता, जीवंतता और आकांक्षाओं का प्रतीक है। उन्होंने शहरीकरण, पर्यावरणीय दबाव और जनसंख्या वृद्धि जैसी चुनौतियों का सामना करने के लिए सभी वर्गों के लोगों से मिलकर काम करने की अपील की। संधू ने कहा कि दिल्ली को एक संवेदनशील, सांस्कृतिक रूप से समृद्ध और तकनीकी रूप से प्रगतिशील शहर बनाने की जिम्मेदारी सरकारी और गैर-सरकारी दोनों क्षेत्रों की है। उन्होंने जेएनयू से अपने पुराने जुड़ाव को याद करते हुए कहा कि यह संस्थान विचारों को नई दिशा देने और व्यक्तित्व के निर्माण का स्थान है। कार्यक्रम में शिक्षकों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों की बड़ी संख्या उपस्थित थी, जिन्होंने राजधानी के भविष्य और विकास पर विचार-विमर्श किया।
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यह कार्यक्रम दिल्ली के विकास और पर्यावरण संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयासों को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण है।
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