इलाहाबाद हाई कोर्ट ने RO-ARO भर्ती में नई नियुक्तियों पर लगाई रोक
हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, RO-ARO भर्ती में आरक्षण विवाद के चलते नई नियुक्तियों पर लगाई अंतरिम रोक
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इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने समीक्षा अधिकारी (RO) और सहायक समीक्षा अधिकारी (ARO) भर्ती परीक्षा-2023 में आरक्षण विवाद के कारण नई नियुक्तियों पर रोक लगा दी है। अगली सुनवाई 12 मई को होगी।
- 01हाई कोर्ट ने RO-ARO भर्ती में नई नियुक्तियों पर अंतरिम रोक लगाई।
- 02अगली सुनवाई 12 मई को निर्धारित की गई है।
- 03याचिकाकर्ता ओबीसी वर्ग से हैं और उन्हें असफल घोषित किया गया।
- 04राज्य सरकार ने कहा कि अधिकांश सफल अभ्यर्थियों को नियुक्ति मिल चुकी है।
- 05विशेष अपील में एकल पीठ के आदेश को चुनौती दी गई थी।
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इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने समीक्षा अधिकारी (आरओ) और सहायक समीक्षा अधिकारी (एआरओ) भर्ती परीक्षा-2023 में आरक्षण विवाद के चलते नई नियुक्तियों पर अंतरिम रोक लगा दी है। यह आदेश न्यायमूर्ति राजन राय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की खंडपीठ ने विवेक यादव और अन्य अभ्यर्थियों की विशेष अपील पर सुनवाई के दौरान पारित किया। अगली सुनवाई 12 मई को होगी। याचिकाकर्ता, जो अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) से हैं, ने अदालत में कहा कि उन्होंने प्रारंभिक परीक्षा में सामान्य वर्ग से चयनित कम से कम 25 अभ्यर्थियों से अधिक अंक प्राप्त किए थे, फिर भी उन्हें असफल घोषित कर दिया गया। राज्य सरकार और उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) ने याचिका का विरोध करते हुए बताया कि भर्ती परीक्षा के तहत अधिकांश सफल अभ्यर्थियों को पहले ही नियुक्ति दी जा चुकी है।
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यह निर्णय उन अभ्यर्थियों पर प्रभाव डालेगा जो आरओ-एआरओ भर्ती में भाग ले रहे हैं।
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