मुरादाबाद में मिट्टी की सेहत खराब, 15000 खेतों में जैविक कार्बन की कमी
Moradabad News: मंडल में धरती की सेहत बिगड़ी...15000 खेतों में कम मिले जैविक कार्बन

Image: Amar Ujala
मुरादाबाद मंडल, उत्तर प्रदेश में 16,000 मिट्टी के नमूनों की जांच में 15,000 में आवश्यक पोषक तत्वों की कमी पाई गई है। नाइट्रोजन और जैविक कार्बन की कमी से फसलों की पैदावार घटने का खतरा है। कृषि विभाग ने किसानों को फसल चक्र बनाए रखने और जैविक खाद के उपयोग की सलाह दी है।
- 0116,000 नमूनों में से 15,000 में नाइट्रोजन और जैविक कार्बन की कमी पाई गई है।
- 02मिट्टी में नाइट्रोजन की मात्रा 120 से 240 किलो प्रति हेक्टेयर है, जबकि स्वस्थ मिट्टी में यह 280 से 560 किलो होनी चाहिए।
- 03जैविक कार्बन का स्तर 0.25 से 0.35 प्रतिशत है, जबकि इसे 0.5 से 0.75 प्रतिशत होना चाहिए।
- 04कृषि विभाग ने गोबर और हरी खाद के उपयोग को बढ़ाने की सलाह दी है।
- 05फसल चक्र को बनाए रखना अनिवार्य है, अन्यथा कृषि की स्थिति और बिगड़ सकती है।
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मुरादाबाद मंडल, उत्तर प्रदेश में मिट्टी की सेहत गंभीर रूप से बिगड़ रही है। कृषि विभाग द्वारा किए गए 16,000 मिट्टी के नमूनों के परीक्षण में से 15,000 नमूनों में आवश्यक पोषक तत्वों की कमी पाई गई है, जिससे फसलों की पैदावार में कमी का खतरा बढ़ गया है। सहायक निदेशक (मृदा परीक्षण) हर्षित कुमार चौहान के अनुसार, नाइट्रोजन और जैविक कार्बन की कमी से भूमि बंजर होने का खतरा है। रिपोर्ट में बताया गया है कि नाइट्रोजन की मात्रा 120 से 240 किलो प्रति हेक्टेयर है, जबकि स्वस्थ मिट्टी में यह 280 से 560 किलो होनी चाहिए। जैविक कार्बन का स्तर भी 0.25 से 0.35 प्रतिशत है, जबकि इसे 0.5 से 0.75 प्रतिशत होना चाहिए। विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि वे गोबर और हरी खाद का उपयोग करें और फसल चक्र को बनाए रखें। यदि यह स्थिति बनी रही, तो आने वाले समय में कृषि की स्थिति और भी खराब हो जाएगी।
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यदि मिट्टी की सेहत में सुधार नहीं हुआ, तो किसानों को फसलों की पैदावार में कमी का सामना करना पड़ सकता है, जिससे उनकी आय प्रभावित होगी।
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