सिद्धार्थनगर में मानसून से पहले जलभराव की चिंता बढ़ी
Siddharthnagar News: मानसून सिर पर और नाले अधूरे फिर जलभराव के मुहाने पर शहर
Amar Ujala
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सिद्धार्थनगर में सबसे लंबे नाले का निर्माण धीमी गति से चल रहा है, जबकि मानसून आने में केवल 25 दिन बचे हैं। यदि भारी बारिश होती है, तो जलभराव की समस्या उत्पन्न हो सकती है, जिससे शहरवासियों और आगंतुकों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा।
- 01नगर के सबसे लंबे नाले का निर्माण लगभग दो महीने पहले शुरू हुआ था, लेकिन इसकी गति धीमी है।
- 02अगर मानसून समय पर आया और भारी बारिश हुई, तो जलभराव की समस्या निश्चित है।
- 03अशोक मार्ग, जो तहसील और रेलवे क्रॉसिंग को जोड़ता है, शहर की लाइफलाइन है।
- 04नाले के जाम और क्षतिग्रस्त होने के कारण जलनिकासी में दिक्कतें हो रही हैं।
- 05बारिश के दौरान मोहल्लों के मार्गों पर जलभराव से लोगों को परेशानी होती है।
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सिद्धार्थनगर में नगर के सबसे लंबे नाले का निर्माण कार्य शुरू हो चुका है, लेकिन इसकी गति बहुत धीमी है। मानसून आने में मात्र 25 दिन बचे हैं, और यदि बारिश समय पर होती है तो जलभराव की समस्या उत्पन्न होना तय है। यह स्थिति न केवल शहरवासियों के लिए, बल्कि शहर में आने वाले आगंतुकों के लिए भी कठिनाइयां पैदा कर सकती है। अशोक मार्ग, जो तहसील और रेलवे क्रॉसिंग को जोड़ता है, शहर की लाइफलाइन के रूप में कार्य करता है। इस मार्ग पर स्थित नाला मोहल्लों से निकलने वाले पानी को बाहर निकालने में मदद करता है। हाल के समय में नाले के जाम और क्षतिग्रस्त होने के कारण जलनिकासी में समस्याएं आ रही हैं। बारिश के दिनों में मोहल्लों के मार्गों पर जलभराव से लोगों की मुसीबतें बढ़ जाती हैं। करोड़ों रुपये की लागत से नाले का निर्माण कार्य लगभग दो महीने पहले शुरू हुआ था, लेकिन इसकी रफ्तार बहुत कम है, जिससे स्थानीय निवासियों में चिंता बढ़ रही है।
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यदि जलभराव की समस्या उत्पन्न होती है, तो स्थानीय निवासियों और आगंतुकों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।
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