Siddharthnagar में भूसे की कीमतों में तेजी से वृद्धि, पशुपालकों की चिंताएँ बढ़ीं
Siddharthnagar News: भूसे की ‘आग’ से पशुपालक बेहाल, एक महीने में दोगुनी हुई कीमत
Amar Ujala
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Siddharthnagar, Uttar Pradesh में गेहूं के भूसे की कीमतें एक महीने में 500 रुपये से बढ़कर 1200 रुपये प्रति क्विंटल हो गई हैं। इस वृद्धि से पशुपालकों की आर्थिक स्थिति पर बुरा असर पड़ा है, खासकर उन परिवारों पर जिनकी आय का मुख्य स्रोत पशुपालन है। प्रशासन से भूसे की उपलब्धता और कीमतों पर नियंत्रण की मांग की जा रही है।
- 01भूसे की कीमतें पिछले एक महीने में 500 रुपये से बढ़कर 1200 रुपये प्रति क्विंटल हो गई हैं।
- 02किसानों का मानना है कि यदि स्थिति नहीं सुधरी, तो कीमतें 2000 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुँच सकती हैं।
- 03इस वर्ष गेहूं की कटाई के दौरान बारिश ने भूसे को सबसे ज्यादा नुकसान पहुँचाया।
- 04हार्वेस्टर मशीनों से कटाई के कारण लगभग 40 प्रतिशत भूसा नष्ट हो जाता है।
- 05पशुपालकों ने प्रशासन से भूसे की उपलब्धता सुनिश्चित करने और कीमतों पर नियंत्रण की मांग की है।
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Siddharthnagar, Uttar Pradesh में गेहूं के भूसे की कमी ने पशुपालकों के लिए गंभीर चिंता का विषय बना दिया है। पिछले एक महीने में भूसे की कीमतें 500 रुपये प्रति क्विंटल से बढ़कर 1200 रुपये तक पहुँच गई हैं। ग्रामीणों का मानना है कि यदि यही स्थिति बनी रही, तो आने वाले दिनों में कीमतें 2000 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुँच सकती हैं। इस वृद्धि का सबसे अधिक असर उन परिवारों पर पड़ रहा है, जिनकी आय का मुख्य सहारा पशुपालन है। किसानों ने बताया कि इस वर्ष गेहूं की कटाई के दौरान हुई बारिश ने भूसे को सबसे ज्यादा नुकसान पहुँचाया है, जिससे खेतों में पड़े गेहूं के अवशेष भीगने और सड़ने से बड़ी मात्रा में भूसा खराब हो गया। इसके अलावा, हार्वेस्टर मशीनों से कटाई के कारण भी भूसे की कमी हो रही है, क्योंकि पारंपरिक तरीकों की तुलना में हार्वेस्टर से कटाई में लगभग 40 प्रतिशत भूसा नष्ट हो जाता है। पशुपालकों को महंगे दामों पर भूसा खरीदना पड़ रहा है, जिससे उनकी पशुपालन लागत बढ़ रही है। रामदुलारे नामक एक पशुपालक ने बताया कि उन्होंने हाल ही में 1200 रुपये प्रति क्विंटल की दर से भूसा खरीदा है। यदि हालात जल्दी नहीं सुधरे, तो बरसात और गर्मी के महीनों में चारे का संकट और गहरा हो सकता है।
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भूसे की बढ़ती कीमतों से पशुपालकों की आर्थिक स्थिति पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है, जिससे उनके लिए पशुपालन करना मुश्किल हो रहा है।
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