ममता बनर्जी की कविता 'गिरगिट' में टीएमसी के बागियों पर निशाना
'गिरगिट से भी भयंकर, चंद घंटों में रंग बदलने वाले', TMC से इस्तीफा देने वालों पर विफरीं ममता, कविता में बयां किया दर्द

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पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में आंतरिक कलह और इस्तीफों की बाढ़ के बीच, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपनी नई कविता 'गिरगिट' के माध्यम से बागी नेताओं पर तीखा प्रहार किया है। कविता में उन्होंने स्वार्थ और धोखेबाजी के खिलाफ चेतावनी दी है, जबकि पार्टी की स्थिति संकट में है।
- 01ममता बनर्जी की कविता 'गिरगिट' में बागी नेताओं को रंग बदलने वाले गिरगिटों से तुलना की गई है।
- 02बारासात की सांसद काकली घोष दस्तीदार ने पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा देकर टीएमसी को बड़ा झटका दिया।
- 03टीएमसी के कई विधायक और पार्षद भी पार्टी नेतृत्व के खिलाफ खुलकर बोलने लगे हैं।
- 04बागी नेताओं का आरोप है कि चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर की संस्था आई-पैक (I-PAC) ने पार्टी के पुराने नेताओं की अनदेखी की।
- 05टीएमसी के स्थानीय निकायों में बागी नेताओं के इस्तीफों के कारण सत्ता खोने का खतरा बढ़ गया है।
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पश्चिम बंगाल की तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में हाल के दिनों में भारी राजनीतिक उथल-पुथल देखने को मिल रही है। पार्टी के कई पुराने नेता बगावती सुर में हैं और इस्तीफों की झड़ी ने टीएमसी आलाकमान की नींद उड़ा दी है। इस संकट के बीच, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपनी नई कविता 'गिरगिट' के माध्यम से बागी नेताओं पर तीखा प्रहार किया है। कविता में उन्होंने कहा है कि कुछ लोग अपने स्वार्थ के लिए चंद घंटों में रंग बदल रहे हैं। उन्होंने जनता से अपील की है कि वे ऐसे नेताओं के चेहरे को पहचानें और उनके प्रति सतर्क रहें। इस कविता के माध्यम से ममता ने बागियों को चेतावनी दी है और पार्टी के वफादार कार्यकर्ताओं को एकजुट रखने का प्रयास किया है। टीएमसी के भीतर असंतोष का आलम यह है कि कई प्रमुख नेताओं ने पार्टी के नेतृत्व और चुनावी रणनीतियों पर सवाल उठाना शुरू कर दिया है।
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टीएमसी के भीतर बगावत और इस्तीफों का सिलसिला स्थानीय निकायों में पार्टी के नियंत्रण को खतरे में डाल सकता है।
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