झारखंड में डायन प्रथा के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग का बड़ा अभियान शुरू
Jamshedpur News: डायन प्रथा मिटाने को गांवों में चौपाल लगाएंगे डॉक्टर और मनोचिकित्सक, 2000 सहिया अलर्ट

Image: Jagran
झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले में डायन प्रथा के खिलाफ एक व्यापक अभियान शुरू किया जा रहा है। डॉक्टर, मनोचिकित्सक और सहिया दीदियाँ गाँवों में चौपाल लगाकर ग्रामीणों को जागरूक करेंगी। यह पहल अंधविश्वास को समाप्त करने और महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए है।
- 01पूर्वी सिंहभूम के स्वास्थ्य विभाग ने डायन प्रथा के खिलाफ एक अभियान शुरू किया है।
- 022000 सहिया दीदियाँ इस अभियान का हिस्सा बनेंगी और ग्रामीणों को जागरूक करेंगी।
- 03विशेष निगरानी टीमों का गठन किया जाएगा जो संवेदनशील परिवारों की पहचान करेंगी।
- 04स्वास्थ्य शिविर, नुक्कड़ नाटक और चौपालों का आयोजन किया जाएगा।
- 05अभियान में धार्मिक और सामाजिक पहलुओं पर भी ध्यान दिया जाएगा।
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झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले में डायन प्रथा के खिलाफ एक महत्वपूर्ण अभियान की शुरुआत की जा रही है, जिसका उद्देश्य अंधविश्वास और सामाजिक हिंसा को समाप्त करना है। स्वास्थ्य विभाग ने डॉक्टरों, मनोचिकित्सकों और 2000 सहिया दीदियों को शामिल करते हुए गाँवों में चौपाल लगाने का निर्णय लिया है। यह पहल ग्रामीणों को वैज्ञानिक तथ्यों के माध्यम से जागरूक करने पर केंद्रित है, ताकि वे समझ सकें कि मिर्गी, मानसिक तनाव और अन्य बीमारियाँ जादू-टोना से नहीं जुड़ी हैं। इसके लिए विशेष निगरानी टीमों का गठन किया जाएगा, जो ऐसे परिवारों की पहचान करेंगी जहाँ अंधविश्वास के कारण हिंसा की आशंका है। इस अभियान में पंचायत प्रतिनिधियों और सामाजिक संस्थाओं की मदद भी ली जाएगी। डॉ. साहिर पाल, सिविल सर्जन, ने कहा कि वैज्ञानिक सोच और सही इलाज के प्रति जागरूकता ही इस समस्या का समाधान है।
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इस अभियान से ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं की सुरक्षा बढ़ेगी और अंधविश्वास के खिलाफ जागरूकता फैलेगी।
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