मई का पहला गुरु प्रदोष: पूजा विधि और महत्व जानें
मई का पहला गुरु प्रदोष आज: शुभ मुहूर्त में करें महादेव की पूजा, जानें महत्व, पूजा विधि और पारण का समय
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इस वर्ष का पहला गुरु प्रदोष व्रत 14 मई को है, जो भगवान शिव को समर्पित है। इस दिन पूजा करने से जीवन में सुख-समृद्धि और मानसिक शांति प्राप्त होती है। शुभ मुहूर्त शाम 5:22 से 7:04 बजे तक है।
- 01गुरु प्रदोष व्रत 14 मई को है, जो भगवान शिव को समर्पित है।
- 02इस दिन पूजा करने से जीवन में सुख और समृद्धि मिलती है।
- 03शुभ मुहूर्त शाम 5:22 से 7:04 बजे तक है।
- 04व्रत करने से शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है।
- 05कुंडली में गुरु ग्रह की स्थिति सुधारने के लिए यह व्रत किया जाता है।
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मई का पहला गुरु प्रदोष व्रत 14 मई 2026 को है, जो भगवान शिव को समर्पित है। इस दिन का महत्व धार्मिक आस्था के साथ-साथ मानसिक शांति और पारिवारिक सौहार्द को बढ़ाने में भी है। हिंदू पंचांग के अनुसार, त्रयोदशी तिथि का आरंभ 14 मई को दोपहर 11:21 बजे होगा और समाप्ति 15 मई को सुबह 8:32 बजे होगी। इस दिन पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 5:22 से 7:04 बजे तक है। पूजा विधि में सुबह स्नान, साफ कपड़े पहनना, और भगवान शिव के सामने दीपक जलाना शामिल है। शाम को पंचामृत से अभिषेक और आरती की जाती है। इस व्रत को करने से शत्रुओं पर विजय और रुके हुए कार्यों में प्रगति होती है।
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यह व्रत करने से व्यक्तियों को मानसिक शांति और पारिवारिक सौहार्द में सुधार की उम्मीद होती है।
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