कलियुग में श्रीमद्भागवत कथा का महत्व: अनिल शास्त्री
श्रीमद्भागवत सुनने से नष्ट हो ताते हैं कलियुग के सारे दोष : अनिल शास्त्री
Amar Ujala
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कुरुक्षेत्र में आयोजित कथा में अनिल शास्त्री ने बताया कि श्रीमद्भागवत सुनने से कलियुग के दोष समाप्त हो जाते हैं। उन्होंने भक्ति, ज्ञान और वैराग्य की पुष्टि के लिए कथा के महत्व पर जोर दिया। कथा में कई प्रमुख व्यक्ति उपस्थित थे।
- 01श्रीमद्भागवत कथा सुनने से कलियुग के दोष नष्ट होते हैं।
- 02भक्ति, ज्ञान और वैराग्य की पुष्टि के लिए कथा का महत्व है।
- 03कथा वाचक ने नारदजी और सनकादि मुनियों का उल्लेख किया।
- 04श्रीमद्भागवत का पारायण ज्ञानयज्ञ का सूचक माना जाता है।
- 05कथा में कई प्रमुख व्यक्ति शामिल हुए थे।
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कुरुक्षेत्र में गौरी शंकर मंदिर में आयोजित कथा के दौरान कथा वाचक अनिल शास्त्री ने बताया कि श्रीमद्भागवत कथा सुनने से कलियुग के सारे दोष समाप्त हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि भक्ति, ज्ञान और वैराग्य की पुष्टि के लिए भगवान नारायण ने जो उपाय बताए हैं, उनका अनुसरण करना आवश्यक है। नारदजी द्वारा सनकादि मुनियों से भक्ति और ज्ञान के मार्ग पर चर्चा की गई। शास्त्री ने बताया कि चार प्रकार के यज्ञ होते हैं, लेकिन ज्ञानयज्ञ को ही मुक्तिदायक कर्म माना गया है। उन्होंने यह भी कहा कि श्रीमद्भागवत का गान सुनने से भक्ति और ज्ञान में वृद्धि होती है। इस अवसर पर कई प्रमुख व्यक्ति जैसे नरेश गर्ग, येशेंद्र शर्मा, और डॉ. पुरुषोत्तम शास्त्री भी उपस्थित थे।
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श्रीमद्भागवत कथा सुनने से स्थानीय लोगों में भक्ति और ज्ञान का संचार होगा, जिससे समाज में सकारात्मक बदलाव आ सकता है।
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