मैथिली भाषा को मिली नई पहचान, सीबीएसई में शामिल होने से बढ़ा सम्मान
आडवाणी की पहल पर अटल ने दिलाई पहचान, मोदी सरकार ने दिया विस्तार, एनडीए सरकार में मैथिली का बढ़ता गया सम्मान

Image: News 18 Hindi
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने मैथिली भाषा को अपने पाठ्यक्रम में शामिल करने का निर्णय लिया है, जिससे इसे कक्षा 1 से माध्यमिक स्तर तक पढ़ाया जाएगा। यह निर्णय मिथिलांचल की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करेगा और पिछले प्रयासों का परिणाम है, जिसमें लालकृष्ण आडवाणी और अटल बिहारी वाजपेयी की पहल शामिल हैं।
- 01सीबीएसई ने 2026-27 से कक्षा 1 से 10 तक मैथिली को पाठ्यक्रम में शामिल करने का निर्णय लिया है।
- 02यह निर्णय बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी द्वारा मिथिला की सांस्कृतिक अस्मिता के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना गया।
- 03लालकृष्ण आडवाणी ने 2003 में मैथिली के भाषाई महत्व को समझते हुए इसे संविधान की मुख्य धारा में लाने की पहल की थी।
- 04प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मैथिली को UPSC परीक्षा में वैकल्पिक विषय के रूप में बनाए रखा है।
- 05संविधान का मैथिली संस्करण 26 नवंबर 2024 को विमोचित किया गया, जिससे मैथिली की सांस्कृतिक पहचान को और मजबूती मिली।
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पटना में, केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने मैथिली भाषा को अपने पाठ्यक्रम में शामिल करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है, जिससे इसे कक्षा 1 से माध्यमिक स्तर तक पढ़ाया जाएगा। यह निर्णय मिथिलांचल की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और भाषाई गौरव को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता देता है। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इसे मिथिला की सांस्कृतिक अस्मिता के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताया है। यह कदम लंबे समय से मैथिली को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता दिलाने की मांग का परिणाम है। लालकृष्ण आडवाणी और अटल बिहारी वाजपेयी की पहलों ने मैथिली को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किया, जिससे इसे संवैधानिक भाषा का दर्जा मिला। इसके अलावा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने मैथिली को UPSC परीक्षा में वैकल्पिक विषय के रूप में बनाए रखा और डिजिटल इंडिया के तहत मैथिली के तकनीकी समावेशन को बढ़ावा दिया। 26 नवंबर 2024 को संविधान दिवस पर मैथिली में संविधान का आधिकारिक संस्करण जारी किया गया, जो इसे नागरिकों के लिए और अधिक सुलभ बनाता है।
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इस निर्णय से मिथिलांचल की सांस्कृतिक पहचान को मजबूती मिलेगी और युवा पीढ़ियों को अपनी मातृभाषा से जोड़ने का अवसर मिलेगा।
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