सीबीएसई पाठ्यक्रम में आठवीं कक्षा तक मैथिली भाषा की पढ़ाई शुरू
सीबीएसई में अब आठवीं तक मातृभाषा मैथिली की पढ़ाई, शिक्षा मंत्रालय का बड़ा फैसला

Image: Jagran
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने पहली से आठवीं कक्षा तक मैथिली भाषा को मातृभाषा विषय के रूप में मान्यता दी है। यह निर्णय राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 के तहत लिया गया है, जिससे मैथिली को पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा। यह कदम मिथिलावासियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
- 01केंद्रीय शिक्षा राज्यमंत्री जयंत चौधरी ने सांसद डा. गोपाल जी ठाकुर को पत्र भेजकर इस निर्णय की जानकारी दी।
- 02एनसीईआरटी ने मैथिली सहित 121 भारतीय भाषाओं में प्राइमर विकसित किए हैं।
- 03सीबीएसई पाठ्यक्रम में मैथिली भाषा को 2026-27 शैक्षणिक सत्र से शामिल किया जाएगा।
- 04सांसद डा. ठाकुर ने इस पहल के लिए केंद्रीय शिक्षा मंत्री से मुलाकात की थी।
- 05यह निर्णय 8.5 करोड़ मिथिलावासियों का सम्मान माना जा रहा है।
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केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने पहली से आठवीं कक्षा तक मैथिली भाषा को मातृभाषा विषय के रूप में मान्यता देने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। इस संबंध में केंद्रीय शिक्षा राज्यमंत्री जयंत चौधरी ने सांसद डा. गोपाल जी ठाकुर को पत्र भेजकर जानकारी दी। यह निर्णय राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 की अनुशंसा के अनुसार लिया गया है, जिसमें कक्षा पांचवीं तक और यथासंभव कक्षा आठवीं तक मातृभाषा को शिक्षण का माध्यम बनाने की बात कही गई है। एनसीईआरटी ने मैथिली सहित 121 भारतीय भाषाओं में प्राइमर विकसित किए हैं और पाठ्य पुस्तकों का अनुवाद भी किया जा रहा है। सीबीएसई ने यह सुनिश्चित किया है कि 2026-27 शैक्षणिक सत्र से मैथिली पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा। सांसद डा. ठाकुर ने इस पहल के लिए केंद्रीय शिक्षा मंत्री से मुलाकात करके मिथिलावासियों की भावना को व्यक्त किया था। उन्होंने इसे 8.5 करोड़ मिथिलावासियों का सम्मान बताया है, और कहा कि यह कदम भविष्य में मैथिलीभाषियों के लिए वरदान साबित होगा।
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इस निर्णय से मैथिलीभाषी छात्रों को अपनी मातृभाषा में शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलेगा, जिससे उनके शैक्षणिक विकास को बढ़ावा मिलेगा।
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