हिमाचल प्रदेश में भूस्खलन रोकने के लिए नई नीति का निर्माण
लैंडस्लाइड मुक्त होगा हिमाचल? सरकार लाएगी नई ठोस नीति; प्रधान सचिव की अध्यक्षता में 12 मई को मंथन
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हिमाचल प्रदेश, भारत में भूस्खलन की बढ़ती घटनाओं से निपटने के लिए राज्य सरकार एक नई नीति तैयार कर रही है। 12 मई को प्रधान सचिव देवेश कुमार की अध्यक्षता में बैठक में इस नीति पर चर्चा होगी, जिसमें भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों की पहचान और रोकथाम के उपाय शामिल होंगे।
- 01हिमाचल प्रदेश में भूस्खलन की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं।
- 0212 मई को सचिवालय में नई नीति पर चर्चा होगी।
- 03पांच सरकारी विभागों की संयुक्त कमेटी बनाई गई है।
- 04भूस्खलन रोकने के लिए तकनीकी और वैज्ञानिक उपायों पर जोर दिया जा रहा है।
- 05विशेषज्ञों का मानना है कि समय रहते कदम उठाने से नुकसान कम किया जा सकता है।
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हिमाचल प्रदेश में प्राकृतिक आपदाओं के चलते भूस्खलन की घटनाएं बढ़ रही हैं, जिससे जनजीवन और बुनियादी ढांचे को नुकसान हो रहा है। राज्य सरकार ने इस समस्या से निपटने के लिए एक नई नीति बनाने का निर्णय लिया है, जो 12 मई को प्रधान सचिव देवेश कुमार की अध्यक्षता में प्रस्तावित बैठक में चर्चा के लिए प्रस्तुत की जाएगी। इस नीति में भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों की पहचान, भूस्खलन के कारणों का अध्ययन और रोकथाम के उपाय शामिल होंगे। इसके लिए पांच सरकारी विभागों — लोक निर्माण, जल शक्ति, आपदा प्रबंधन, राजस्व और वन विभाग — की एक संयुक्त कमेटी गठित की गई है, जो वैज्ञानिक और तकनीकी आधार पर स्थायी समाधान खोजेगी। सरकार भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में ड्रेनेज सिस्टम सुधार, ढलानों की मजबूती, पौधारोपण और रिटेनिंग वाल जैसे उपायों को प्राथमिकता दे रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय पर ठोस कदम उठाए जाएं, तो मानसून के दौरान होने वाले नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
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नई नीति से भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा बढ़ेगी और संभावित नुकसान को कम किया जा सकेगा।
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