मध्य प्रदेश का काला गिद्ध उज्बेकिस्तान पहुंचा, 3000 किमी की यात्रा की
MP का गिद्ध उज्बेकिस्तान पहुंचा, हलाली डैम से उड़ान भरकर तय किया 3000 KM का सफर, 3 देश किए पार
Nbt NavbharattimesImage: Nbt Navbharattimes
मध्य प्रदेश, भारत के विदिशा जिले से रेस्क्यू किया गया काला गिद्ध, जिसे 'सिनेरियस विल्चर' कहा जाता है, ने 3000 किलोमीटर की यात्रा करते हुए उज्बेकिस्तान पहुंचा। यह गिद्ध वन्यजीव संरक्षण कार्यक्रम की सफलता को दर्शाता है और वैज्ञानिक मॉनिटरिंग की मदद से इसकी यात्रा का ट्रैक रखा गया।
- 01काला गिद्ध ने 3000 किमी की यात्रा की और उज्बेकिस्तान पहुंचा।
- 02यह गिद्ध मध्य प्रदेश के गिद्ध संरक्षण कार्यक्रम की सफलता का प्रतीक है।
- 03गिद्ध को रेस्क्यू करने के बाद दो महीने तक इलाज किया गया।
- 04इसकी यात्रा को GPS के माध्यम से ट्रैक किया गया।
- 05गिद्धों की आबादी को बचाने के लिए यह एक नई उम्मीद है।
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मध्य प्रदेश, भारत के विदिशा जिले से रेस्क्यू किया गया 'सिनेरियस विल्चर' या काला गिद्ध ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। यह गिद्ध 19 दिसंबर 2025 को घायल अवस्था में मिला था और दो महीने के इलाज के बाद 23 फरवरी 2026 को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा हलाली डैम से मुक्त किया गया। GPS टैग के माध्यम से इसकी यात्रा को ट्रैक किया गया, जिसमें यह लगभग एक महीने तक हलाली डैम के आसपास रहा और फिर 10 अप्रैल को अपनी लंबी यात्रा शुरू की। गिद्ध ने राजस्थान के रास्ते पाकिस्तान में दाखिल होकर अफगानिस्तान के आसमान को पार करते हुए 4 मई को उज्बेकिस्तान पहुंचा। यह घटना गिद्धों की घटती आबादी के बीच संरक्षण की नई उम्मीद जगाती है और यह दर्शाती है कि मध्य प्रदेश वैज्ञानिक वन्यजीव संरक्षण में एक प्रमुख केंद्र बन रहा है।
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इस सफल रेस्क्यू और यात्रा से गिद्धों की घटती आबादी को बचाने के लिए नई उम्मीद जगी है।
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