बजाज हिंदुस्तान को सेबी से बड़ा झटका, फंड हेराफेरी जांच में याचिका खारिज
फंड हेराफेरी जांच में बजाज हिंदुस्तान को बड़ा झटका, सेबी ने खारिज की याचिका
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भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने बजाज हिंदुस्तान शुगर लिमिटेड और उसके प्रवर्तकों द्वारा उठाई गई आपत्तियों को खारिज कर दिया है। यह जांच 2011 से 2022 के बीच फंड के गलत इस्तेमाल के आरोपों से संबंधित है, जिसमें 318.5 करोड़ रुपये और 870.6 करोड़ रुपये के फंड के गलत इस्तेमाल के सबूत मिले हैं।
- 01सेबी ने बजाज हिंदुस्तान की याचिका खारिज की।
- 02जांच में 2011 से 2022 के बीच फंड के गलत इस्तेमाल के सबूत मिले।
- 03ओजस इंडस्ट्रीज और बजाज पावर जेनरेशन के माध्यम से फंड का गलत इस्तेमाल हुआ।
- 04कंपनी ने आरबीआई के निर्देशों का हवाला दिया था।
- 05सेबी ने कंपनी की दलील को अस्वीकार किया।
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भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने बजाज हिंदुस्तान शुगर लिमिटेड और उसके प्रवर्तकों शिशिर बजाज और कुशाग्र बजाज द्वारा उठाई गई आपत्तियों को खारिज कर दिया है। यह निर्णय एक जांच के संदर्भ में आया है, जिसमें यह आरोप लगाया गया था कि कंपनी ने ओजस इंडस्ट्रीज और बजाज पावर जेनरेशन के माध्यम से फंड का गलत इस्तेमाल किया है। सेबी ने पहले कहा था कि जांच में 318.5 करोड़ रुपये और 870.6 करोड़ रुपये के फंड के गलत इस्तेमाल के सबूत मिले हैं। इसके अलावा, कंपनी की सालाना रिपोर्टों में भी गुमराह करने वाली जानकारियां दी गई थीं। बजाज हिंदुस्तान ने दलील दी थी कि आरबीआई के निर्देश पर किए गए कर्ज पुनर्गठन के दौरान डेलॉयट और मजर्स द्वारा किए गए फॉरेंसिक ऑडिट में फंड के गलत इस्तेमाल का कोई सबूत नहीं मिला। हालांकि, सेबी ने इस दलील को खारिज कर दिया और जांच को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया।
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यह निर्णय कंपनी की वित्तीय स्थिति को प्रभावित कर सकता है और संभावित रूप से निवेशकों के विश्वास को कमजोर कर सकता है।
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