मध्य प्रदेश हाई कोर्ट का भोजशाला को मंदिर घोषित करने का निर्णय
धार भोजशाला को हाई कोर्ट में माना मंदिर, अब सिर्फ पूजा होगी... हिंदू पक्ष के वकील विष्णु शंकर जैन ने क्या बताया
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मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने धार स्थित भोजशाला परिसर को मंदिर घोषित किया है, जिसमें केवल पूजा की अनुमति होगी। हिंदू पक्ष के वकील विष्णु शंकर जैन ने इसे हिंदू समुदाय की बड़ी जीत बताया और कहा कि कोर्ट ने सभी तर्कों को स्वीकार किया। मुस्लिम पक्ष को वैकल्पिक जमीन के लिए आवेदन करने की अनुमति दी गई है।
- 01हाई कोर्ट ने भोजशाला परिसर को एक हिंदू मंदिर के रूप में मान्यता दी है।
- 02हिंदू पक्ष के वकील विष्णु शंकर जैन ने इसे हिंदू समाज की बड़ी जीत बताया।
- 03कोर्ट ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के 2003 के आदेश को आंशिक रूप से रद्द किया है।
- 04सरकार को लंदन के म्यूजियम से सरस्वती माता की मूर्ति वापस लाने पर विचार करने का निर्देश दिया गया है।
- 05मुस्लिम पक्ष को वैकल्पिक जमीन के लिए आवेदन करने की अनुमति दी गई है।
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मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने धार स्थित भोजशाला परिसर को मंदिर घोषित करते हुए कहा है कि वहां केवल पूजा की अनुमति होगी। अदालत ने यह निर्णय हिंदू पक्ष के तर्कों को स्वीकार करते हुए सुनाया। वकील विष्णु शंकर जैन ने इसे हिंदू समाज की बड़ी जीत बताया। कोर्ट ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के 7 अप्रैल 2003 के आदेश को आंशिक रूप से रद्द कर दिया, जो वहां नमाज की अनुमति देता था। अब भोजशाला परिसर में नमाज नहीं होगी। इसके साथ ही, कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया है कि वह लंदन के म्यूजियम से सरस्वती माता की मूर्ति वापस लाने की मांग पर विचार करे। मुस्लिम पक्ष को वैकल्पिक जमीन के लिए आवेदन करने की अनुमति दी गई है, जिस पर सरकार विचार करेगी। इस फैसले ने भोजशाला परिसर के धार्मिक चरित्र को हिंदू मंदिर के रूप में स्थापित किया है।
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इस निर्णय से हिंदू समुदाय को भोजशाला परिसर में पूजा करने का अधिकार मिल गया है, जबकि मुस्लिम समुदाय को नमाज पढ़ने की अनुमति नहीं होगी।
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