इंदौर हाई कोर्ट का फैसला: भोजशाला परिसर मंदिर, नमाज की अनुमति नहीं
भोजशाला परिसर एक मंदिर है, नमाज नहीं पढ़ी जाएगी... इंदौर हाई कोर्ट का बड़ा फैसला
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इंदौर हाई कोर्ट ने भोजशाला परिसर को एक मंदिर घोषित करते हुए कहा कि यहां केवल पूजा की जा सकती है, नमाज नहीं। हिंदू पक्ष को पूजा का अधिकार दिया गया है, जबकि मुस्लिम पक्ष को अलग स्थान की मांग करने की अनुमति दी गई है। यह मामला अब सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जाएगी।
- 01इंदौर हाई कोर्ट ने भोजशाला परिसर को मंदिर और संस्कृत शिक्षा का केंद्र माना है।
- 02सरकार को निर्देश दिया गया है कि वह परिसर की व्यवस्था के लिए प्रबंध करे।
- 03मुस्लिम पक्ष को कमाल मस्जिद के लिए अलग जगह की मांग करने की अनुमति है।
- 04हिंदू पक्ष के वकील ने कहा कि परिसर में केवल पूजा होगी, नमाज की अनुमति नहीं है।
- 05धार के शहर काजी ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने का इरादा व्यक्त किया है।
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इंदौर हाई कोर्ट ने भोजशाला परिसर को एक मंदिर के रूप में मान्यता दी है, जिससे यह स्पष्ट हो गया है कि यहां केवल पूजा की जाएगी और नमाज की अनुमति नहीं होगी। अदालत ने कहा कि यह परिसर हिंदू संस्कृति का एक महत्वपूर्ण केंद्र है और यहां देवी सरस्वती की मूर्ति स्थापित की जा सकती है। हिंदू पक्ष के वकील विष्णु शंकर जैन ने बताया कि राजा भोज द्वारा निर्मित इस इमारत में केवल पूजा-पाठ का अधिकार दिया गया है। मुस्लिम पक्ष को इस परिसर में कोई अधिकार नहीं है, लेकिन उन्हें कमाल मस्जिद के लिए वैकल्पिक स्थान की मांग करने की अनुमति दी गई है। धार के शहर काजी ने इस फैसले को चुनौती देने का इरादा व्यक्त किया है और कहा है कि वे सुप्रीम कोर्ट में अपील करेंगे। यह मामला धार्मिक और सांस्कृतिक संवेदनाओं से जुड़ा हुआ है, जिससे दोनों पक्षों के लिए यह महत्वपूर्ण है।
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यह फैसला धार्मिक स्थलों के प्रबंधन और पूजा के अधिकारों को प्रभावित करेगा।
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