भोजशाला विवाद में उच्च न्यायालय का फैसला, शहर काजी ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की योजना बताई
भोजशाला फैसले के बाद शहर काजी ने कहा- हाईकोर्ट का सम्मान, सुप्रीम कोर्ट में करेंगे अपील
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मध्यप्रदेश के धार स्थित भोजशाला परिसर को लेकर इंदौर उच्च न्यायालय ने इसे मंदिर के रूप में मान्यता दी है। शहर काजी ने इस फैसले का सम्मान करते हुए सुप्रीम कोर्ट में अपील करने की योजना बनाई है। इस विवाद का इतिहास हिंदू और मुस्लिम समुदायों के बीच लंबे समय से चला आ रहा है।
- 01इंदौर उच्च न्यायालय ने भोजशाला को मंदिर के रूप में मान्यता दी है, जिससे विवाद में नया मोड़ आया है।
- 02धार के शहर काजी ने कहा कि वे उच्च न्यायालय के फैसले का सम्मान करते हैं और सुप्रीम कोर्ट में अपील करेंगे।
- 03हिंदू पक्ष ने एएसआई की रिपोर्ट में मिले शिलालेख और मूर्तियों को मंदिर होने का प्रमाण बताया।
- 04मुस्लिम पक्ष ने एएसआई रिपोर्ट को पक्षपातपूर्ण बताते हुए चुनौती दी है।
- 05कोर्ट ने कहा कि परिसर में केवल पूजा-पाठ की अनुमति होगी, नमाज की नहीं।
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मध्यप्रदेश के धार में भोजशाला परिसर को लेकर चल रहे विवाद में इंदौर उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है, जिसमें इसे मंदिर के रूप में मान्यता दी गई है। यह फैसला हिंदू और मुस्लिम समुदायों के बीच लंबे समय से चल रहे विवाद को लेकर आया है। शहर काजी ने इस फैसले का सम्मान करते हुए कहा कि वे इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देंगे। उन्होंने कहा कि सलमान खुर्शीद ने इस मुद्दे पर अच्छी बहस की। एएसआई की रिपोर्ट में यह बताया गया है कि भोजशाला परिसर में पहले एक विशाल मंदिर था, जिसका निर्माण राजा भोज ने कराया था। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि परिसर में केवल पूजा की अनुमति होगी, जबकि नमाज की अनुमति नहीं दी जाएगी। मुस्लिम समुदाय को वैकल्पिक जमीन देने का सुझाव भी दिया गया है। यह मामला 11वीं सदी के इस ऐतिहासिक स्मारक की पहचान को लेकर है, जिसमें हिंदू और मुस्लिम दोनों पक्षों ने अपने-अपने दावे पेश किए हैं।
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इस फैसले से धार के स्थानीय समुदायों में धार्मिक पहचान और पूजा-पाठ के अधिकारों पर प्रभाव पड़ेगा।
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