उदयपुर के सास-बहू मंदिर का अनोखा इतिहास और वास्तुकला
विष्णु के 'दशावतार' अवतार को समर्पित राजस्थान का ये 1000 साल पुराना मंदिर, जानें क्यों पड़ा 'सास-बहू' नाम?
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उदयपुर, राजस्थान के नागदा गांव में स्थित सास-बहू मंदिर, भगवान विष्णु के सहस्रबाहु अवतार को समर्पित है। यह लगभग 1000 वर्ष पुराना है और अपनी अद्भुत वास्तुकला और नाम के कारण प्रसिद्ध है। मंदिर का मूल नाम 'सहस्रबाहु' था, जो समय के साथ 'सास-बहू' में परिवर्तित हो गया।
- 01सास-बहू मंदिर भगवान विष्णु के सहस्रबाहु अवतार को समर्पित है।
- 02यह मंदिर लगभग 1000 वर्ष पुराना है और कच्छपघात राजवंश द्वारा बनवाया गया था।
- 03मंदिर का मूल नाम 'सहस्रबाहु' था, जो समय के साथ 'सास-बहू' में बदल गया।
- 04मंदिर परिसर में दो मुख्य मंदिर हैं: बड़ा 'सास' और छोटा 'बहू'।
- 05यह स्थल भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा संरक्षित स्मारक है और पर्यटन के लिए आकर्षक है।
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उदयपुर, राजस्थान के नागदा गांव में स्थित सास-बहू मंदिर, भगवान विष्णु के सहस्रबाहु अवतार को समर्पित है। यह मंदिर लगभग 1000 वर्ष पुराना है और इसका निर्माण कच्छपघात राजवंश के राजा महिपाल और रत्नपाल द्वारा 10वीं शताब्दी के अंत में किया गया था। मंदिर की वास्तुकला 'नागर' शैली का उत्कृष्ट उदाहरण है। इसका मूल नाम 'सहस्रबाहु' था, जिसका अर्थ है 'हजार भुजाओं वाला', लेकिन उच्चारण में सरलता के कारण यह 'सास-बहू' के नाम से जाना जाने लगा। परिसर में दो मुख्य मंदिर हैं: बड़ा 'सास' और छोटा 'बहू', जिनके चारों ओर छोटे मंदिर भी हैं। मंदिर की दीवारों पर भगवान ब्रह्मा, शिव, विष्णु, राम, बलराम और परशुराम की खूबसूरत मूर्तियां बनी हुई हैं। यह स्थल न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि राजस्थान की प्राचीन वास्तुकला का जीवंत उदाहरण भी है। एएसआई द्वारा संरक्षित इस परिसर में 360 डिग्री वर्चुअल टूर की सुविधा भी उपलब्ध है, जिससे लोग दूर से भी इसकी भव्यता का अनुभव कर सकते हैं।
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यह मंदिर न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि पर्यटन को भी बढ़ावा देता है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को लाभ होता है।
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