BBC पर आतंकियों की छवि चमकाने का आरोप, हमजा बुरहान को बताया ‘कॉलेज प्रिंसिपल’
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हाल ही में डीएनएकी एक रिपोर्ट में हमने आपको बताया था किस तरह पुलवामा हमले के मास्टरमाइंड अल-बदर कमांडर हमजा बुरहान उर्फ डॉक्टर उर्फ अरजुमंद गुलज़ार डार को पीओके में अज्ञात हमलावरों ने गोली मार दी थी. लेकिन उसकी मौत के बाद बीबीसी ने अपनी रिपोर्ट में आतंकी हमजा को कॉलेज का प्रिंसिपल बताया है. जो पुलवामा में 40 सीआरपीएफ जवानों की हत्या का मास्टरमाइंड है. दुनिया से उसकी असलियत को छिपाने की कोशिश की है. ये रिपोर्ट छापने वाले भी नॉर्वे के उन सपेरे संपादकों के वैचारिक मित्र हैं, जो भारतीयों की सफलता को नजरअंदाज करते हैं. पहले आप जानिए कैसे अपने वैचारिक मित्रों की तरह इस रिपोर्ट में बीबीसी ने भारत में खून खराबा करने वाले आतंकवादी के असली चेहरे को अपनी हेडलाइन के बैनर से ढकने की कोशिश की है. आज आपको बीबीसी की इस रिपोर्ट की मुख्य बातों को जानना चाहिए ताकि आप समझ पाएं किस तरह पश्चिमी मीडिया भारत के खिलाफ छिपा हुआ एजेंडा चलाती हैं. बीबीसी ने ये रिपोर्ट उर्दू और हिंदी दोनों भाषाओं में छापी है. जिसमें आतंकी को सहानुभूति दिलाने की कोशिश की गई है. बीबीसी की रिपोर्ट में बताया गया. मुजफ्फराबाद के गोजरा क्षेत्र के एक निजी कॉलेज के प्रिंसिपल हमजा बुरहान की गुरुवार दोपहर गोली मारकर हत्या कर दी गई. मतलब अपनी रिपोर्ट में बीबीसी ने हमजा की आतंकी पहचान छिपाकर उसको कॉलेज प्रिंसिपल बताकर, उसके लिए सहानुभूति पैदा करवाने की कोशिश की . बीबीसी की भाषा देखिए, बीबीसी की रिपोर्ट में लिखा गया बीते दिन हुए हमले में गंभीर रूप से घायल हुए एएमएस कॉलेज के प्रिंसिपल हमज़ा बुरहान ने सीएमएच में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया. बीबीसी की सम्मानजनक भाषा सुनकर ऐसा लग रहा है कि पुलवामा में सीआरपीएफ जवानों की हत्या का मास्टरमाइंड आतंकी नहीं बल्कि कोई महापुरुष है, जिसकी मौत से समाज को बड़ा नुकसान हुआ है. बीबीसी ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि हमजा बुरहान मुजफ्फराबाद का निवासी थाऔर भारत प्रशासित कश्मीर से पलायन करके आए थे. सोचिए जिसको आईएसआई ने पीओके में आतंकी कमांडर बनाने के लिए बुलाया..उसको बीबीसी की रिपोर्ट में पलायन करके पीओके आने वाला बताया जा रहा है. भारत प्रशासित कश्मीर जैसे शब्द का प्रयोग करना भी भारत विरोधी एजेंडे को हवा देता है बीबीसी की रिपोर्ट में बताया गया हमज़ा बुरहान की मौत के बाद स्थानीय छात्रों ने विरोध प्रदर्शन भी किया. यानी दुनिया को बताया जा रहा है. हमजा बहुत बड़ा शिक्षाविद था. जिसकी मौत से पाकिस्तानी छात्रों को बहुत सदमा लगा है. बीबीसी ने रिपोर्ट में दिखाई अधूरी तस्वीर आतंकी को प्रिंसिपल बताने वाली अपनी इस रिपोर्ट में बीबीसी जो बताना और दिखाना भूल गया. आपको उन तथ्यों के बारे में भी जानना चाहिए, बीबीसी ने ये नहीं बताया कि जिस हमजा को वो कॉलेज का प्रिंसिपल बता रहा है, उसके जनाजे में वैश्विक आतंकी क्यों पहुंचे थे. बीबीसी ने ये भी नही बताया क्या पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के अफसर हर प्रिंसिपल की मौत पर उसके जनाजे में शामिल होने पहुंचते हैं. या फिर हमजा बुरहान से पाकिस्तान की बदनाम खुफिया एजेंसी का विशेष लगाव था. आपको हमजा बुरहान के जनाने के कुछ वीडियो और तस्वीरें भी बहुत ध्यान से देखनी चाहिए जो स्थानीय लोगों ने अपने मोबाइल कैमरे से शूट की और अब हिंदुस्तान से पाकिस्तान तक वायरल हैं . इस तस्वीर को ध्यान से देखिए. हिजबुल मुजाहिदीन का चीफ आतंकवादी सैयद सलाहुद्दीन भी हमजा बुरहान के नमाज़-ए-जनाजा में शामिल हुआ. हमजा बुरहान के जनाजे में भारी सुरक्षा के साथ सड़क पर पैदल चला. जिन लोगों ने हमजा को प्रिंसिपल बताया. उनको अब एक रिपोर्ट तैयार करके ये भी बताना चाहिए. आखिरकार मोस्ट वांटेड आतंकी एक प्रिंसिपल की आखिरी यात्रा में क्यों पहुंचा था. अगर इनको सैयद सलाहुद्दीन का बैकग्राउंड ना पता हो तो थोड़ी जानकारी हम भी दे देते हैं . आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन का चीफ सैयद सलाहुद्दीन 90 के दशक से कश्मीर में खून खराबा करवा रहा है. आईएसआई आजकल अपने इस करीबी आतंकी को कभी मुजफ्फराबाद कभी रावलपिंडी और कभी इस्लामाबाद में छिपाकर रखती है. अमेरिका ने 26 जून 2017 को सलाहुद्दीन को ग्लोबल आतंकी घोषित किया था. सलाहुद्दीन कश्मीर में सैकड़ों हमलों की जिम्मेदारी ले चुका है इस आतंकी का नाम एनआईए की मोस्ट वांटेड लिस्ट में भी मौजूद है. लेकिन तथाकथित कॉलेज प्रिंसिपल के जनाजे में इस खूंखार आतंकी की मौजूदगी बीबीसी के लिए खबर नहीं है . सलाहुद्दीन के अलावा आतंकी संगठन अल-बदर का चीफ बख्त जमीन खान भी अपनेचेले के जनाजे में पहुंचा था. ये बताता है रावलपिंडी में आतंकियों को पूरी छूट मिली है. जो आतंकी इतनी सुरक्षा के साथ यहां पर पहुंचे, उनका हमजा बुरहान से काफी गहरा नाता था. ISI ने हमजा को स्कूल प्रिंसिपल का कवर देकर छुपाया था, उसे AK-47 से लैस गार्ड भी दिए गए थे, और वह कॉलेज में भी बच्चों को जिहाद का पाठ पढ़ा रहा था . लेकिन बीबीसी ने ISI की इसी झूठी पहचान को ठीक उसी तरह प्रकाशित कर दिया. जैसा पाकिस्तान की ISI चाहती थी. अमेरिका के प्रसिद्ध मानवाधिकार और सामाजिक कार्यकर्ता मैल्कम एक्स ने कहा था अगर आप सावधान नहीं रहे, तो अख़बार आपको उत्पीड़ित लोगों से नफ़रत और उत्पीड़न करने वालों से प्रेम करना सिखा देंगे. आतंकी हमजा बुरहान को अपनी हेडलाइन में निजी कॉलेज का प्रिंसिपल बताकर बीबीसी ऐसा ही खेल खेल रहा है . दुनिया को बीबीसी की हेडलाइन देखकर लगेगा. हमजा बुरहान की मौत से शिक्षा जगत को बहुत बड़ा नुकसान हो गया है. एक ऐसी अपूरणीय क्षति हुई है जिसने पाकिस्तान के हजारों छात्रों को भविष्य को अंधकार में डाल दिया है. हो सकता है...बीबीसी ने इस रिपोर्ट की हेडलाइन बनाने वाले पत्रकार को अप्रेजल के दौरान अच्छा इंक्रीमेंट देने का फैसला भी कर लिया हो . क्योंकि ऐसी हेडलाइंस उसके एजेंडे को बहुत सूट करती हैं. भारत के खिलाफ एजेंडा चलाने वाले ऐसे मीडिया संस्थान कलम वाले कालनेमि हैं. जो अपनी काली स्याही वाली शक्ति से आतंकियों का रूप बदल देते हैं . उनको आतंकी से प्रिंसिपल बना देते हैं. ऐसा पहली बार नहीं हो रहा..जब भारत में खून खराबा करने वाले आतंकियों को बीबीसी और दूसरी पश्चिमी मीडिया ने इज्जत बख्शी हो . कलम वाले कालनेमी ऐसा कारनामा करने के लिए कुख्यात हैं . जुलाई 2016 में जब सुरक्षाबलों ने हिजबुल मुजाहिदीन के कमांडर बुरहान वानी को एनकाउंटर में मार गिराया, तो बीबीसी ने उसे young militant leader और popular separatist commander यानी लोकप्रिय अलगाववादी कमांडर जैसे टाइटल से नवाजा था. बीबीसी ने बताया 15 साल की उम्र में जब पुलिस ने उसे बेवजह पीटा, तब वो आतंकवाद की तरफ मुड़ा. यानी अपनी रिपोर्ट में आतंकी को सहानुभूति दिलवाने वाली भूमिका बनाई गई. बीबीसी ने यह भी लिखा कि भारत बुरहान वानी को आतंकवादी मानता था, लेकिन कश्मीर के कई स्थानीय लोगों के लिए वह नई कश्मीरी पीढ़ी की भावना और राजनीतिक आकांक्षाओं का प्रतीक था. जो चेहरा कश्मीर में खून खराबा करने वाले आतंकी नेटवर्क की प्रेरणा था. वो बीबीसी को कश्मीर की पीढ़ियों की आवाज़ लगता है . बात सिर्फ बुरहान वानी पर खत्म नहीं होती. आतंकी संगठन लश्कर ए तैयबा का चीफ हाफिज सईद. जो मुंबई में 166 निर्दोषों की हत्या का मास्टरमाइंड है. जिसपर 10 मिलियन डॉलर का इनाम है. अमेरिका और UN ने इसे आतंकी घोषित कर रखा है . उस हाफिज सईद पर जब बीबीसी रिपोर्टिंग करता है तो उसको क्या कहता है, जानते हैं- चैरिटी लीडर. बीबीसी के लिए आतंकी हाफिज सईद एक चैरिटी लीडर है. बीबीसी ने 2014 में हाफिज सईद का एक इंटरव्यू लिया. इस इंटरव्यू में उसने भारत को प्रोपेगेंडा फैलाने वाला बताया और बीबीसी ने बिना किसी झिझक के यह दिखा दिया. क्या ब्रिटेन या अमेरिका पर मुंबई जैसा अटैक करने वाले किसी आतंकी को इतनी छूट दी जाती, बिल्कुल नहीं दी जाती. सारी दुनिया की एजेंसियां जानती हैं कि जैश ए मोहम्मद का चीफ आतंकी मसूद अजहर भारत में कई हमलों का मास्टरमाइंड है. लेकिन मार्च 2019 में बीबीसी ने मसूद अज़हर पर खबर चलाते हुए शीर्षक दिया था. China blocks bid to call militant terrorist. यानी चीन ने उग्रवादी को आतंकवादी घोषित करने की कोशिश रोकी. बीबीसी ने मसूद अजहर को आतंकी नहीं उग्रवादी कहा जबकि भारत उसे पुलवामा हमले का मास्टरमाइंड और आतंकी मानता है. बाद में संयुक्त राष्ट्र ने मसूद अजहर को वैश्विक आतंकवादी घोषित किया, लेकिन बीबीसी की कई रिपोर्टों में उसके लिए मिलिटेंट ग्रुप के चीफ जैसे शब्द इस्तेमाल होते रहे. अप्रैल 2025 में पहलगाम में 26 निर्दोष पर्यटकों की धर्म पूछकर हत्या कर दी गई . लेकिन बीबीसी ने अपनी रिपोर्ट में हत्यारों को मिलिटेंट कहा, टेरेरिस्ट नहीं कहा . इसके बाद भारत सरकार ने बीबीसी इंडिया हेड को औपचारिक पत्र लिखकर इस भाषा पर आपत्ति दर्ज कराई थी . ऐसी ही रिपोर्टिंग की वजह से मई 2025 में भारत ने बीबीसी उर्दू के सोशल मीडिया अकाउंट्स को आधिकारिक रूप से ब्लॉक कर दिया था. क्योंकि ये अकाउंट पाकिस्तानी प्रचार तंत्र के आधार पर झूठी खबरें फैला रहा था. ये खबरें भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा थीं . बीबीसी या फिर पश्चिमी मीडिया ने ऐसे खेल खेलने आज नहीं शुरू किए. यह वैचारिक चयन है. जिसमें जब लंदन में हमला हो तो वो आतंकी हमला होता है, लेकिन जब मुंबई या पहलगाम में हमला हो तो उसे उग्रवाद कहा जाता है. जब ISI का कवर एजेंट मरे तो उसको कॉलेज प्रिंसिपल कहा जाता है, जब भारतीय सैनिक शहीद हों तो वो क्रैकडाउन की खबर होती है. कलम के कालनेमि जो कर रहे हैं वो पत्रकारिता नहीं है. प्रोपेगैंडा का सफेदपोश संस्करण है. वैसे बीबीसी जैसे पश्चिमी मीडिया संस्थान अपनी रिपोर्ट में बहुत शातिराना तरीके से आखिर में भारतीय मीडिया के हवाले से ये दावा भी कर जाता है कि भारत में हमजा को पुलवामा अटैक का मास्टरमाइंड कहा जाता है. भारत सरकार ने उसको आतंकी घोषित किया है. लेकिन हेडलाइंस और खबर के नैरेटिव में बीबीसी के लिए वो बस एक प्रिंसिपल रहता है. चाहे उसके जनाजे में तमाम आतंकी संगठनों के सरगना भी क्यों ना पहुंचे हों.
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