अगर ईरान समझौते को तैयार है, तो फिर अमेरिका की जंगी तैनाती क्यों बढ़ रही? डीकोड हुआ ट्रंप का खतरनाक प्लान
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Will US Attack Iran Again: अर्थशास्त्र के मंडल सिद्धांत में आचार्य चाणक्य ने कहा था कि जो राष्ट्र कमजोर होता है वो शांति के लिए प्रयास करता है लेकिन जो शक्तिशाली होता है वो युद्ध की तरफ ही कदम बढ़ाता है. अमेरिका से जो नए संकेत मिल रहे हैं, उससे यही लगता है कि प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप अब युद्ध की तरफ कदम बढ़ा रहे हैं. अमेरिकी मीडिया के मुताबिक अचानक अमेरिकी सैन्य अफसरों की छुट्टियां कैंसिल कर दी गई हैं. सभी वरिष्ठ सैन्य अफसरों को पेंटागन पहुंचने का फरमान भेजा गया है . सैन्य अफसरों के साथ ही साथ वरिष्ठ इंटेलिजेंस अफसरों को भी वॉशिंगटन बुलाया गया है. मिडिल ईस्ट में तैनात अमेरिकी सैनिकों के लिए रिकॉल रोस्टर लागू कर दिया गया है. इसका मतलब है कि ये सैनिक फौरन मिडिल ईस्ट से बाहर निकाले जाएंगे. इनकी जगह दूसरे सैन्य दस्तों की तैनाती की जाएगी. क्या फिर ईरान पर हमला करने जा रहा यूएस? अमेरिकी सैन्य अफसरों को वीकेंड पर बुलाने के साथ खुद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी अपना वीकेंड प्लान कैंसिल कर दिया है. ट्रंप ने सोशल मीडिया पर अपनी छुट्टियों से जुड़ा अपडेट भी दिया है. अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म TRUTH SOCIAL पर ट्रंप ने लिखा, मैं अपने बेटे डॉन की शादी में जाना चाहता था लेकिन सरकार से जुड़े कुछ जरूरी कामों की वजह से मैं नहीं जा पाउंगा. अमेरिका के लिए मुझे ये मौका छोड़कर वॉशिंगटन में ही रहना पड़ेगा. डॉन और उनकी होने वाली पत्नी बेटिना को मेरी बहुत सारी शुभकामनाएं. अगर कोई शख्स अपने बेटे की ही शादी में ना जा रहा हो तो इसका एक ही मतलब है कि ट्रंप बहुत जरूरी काम कर रहे हैं. जिस तरह अमेरिका के सैन्य हलकों में हलचल हो रही है, उसे देखकर यही लगता है कि ट्रंप का ये जरूरी काम ईरान पर हमला करना ही है. ईरान को लेकर ट्रंप के इरादों का एक इशारा उनके ताजा बयान से भी मिल रहा है. ट्रंप की आंखों में चुभ रहा संवर्धित यूरेनियम ट्रंप ने अपने बयान में दो बातों पर जोर दिया है. पहली बात है कि युद्ध में ईरान को बड़ा नुकसान हो चुका है. दूसरी बात ये है कि ईरान किसी भी कीमत पर समझौता चाहता है. अब सवाल उठता है कि जब ट्रंप खुद कह रहे हैं कि ईरान समझौता चाहता है. तो फिर दोबारा जंगी तैयारियों की जरूरत क्यों पड़ रही है. इस सवाल का जवाब है- ईरान का संवर्धित यूरेनियम. ट्रंप चाहते हैं कि ईरान से संवर्धित यूरेनियम छीना जाए. इसीलिए ट्रंप दबाव बढ़ा रहे हैं और अगर दबाव से काम नहीं चला तो दोबारा हमला कर दिया जाएगा. ट्रंप दोनों सूरतों के लिए तैयार बैठे हैं. ईरान पर दोबारा हमले के लिए ट्रंप ने क्या प्लान बनाया है. ये आपको अमेरिका की जंगी तैनाती से पता चल जाएगा. फिलहाल ईरान के इर्द गिर्द अमेरिका के तीन नौसैनिक स्ट्राइक ग्रुप तैनात हैं. अप्रैल के आखिरी हफ्ते में 10 हजार अतिरिक्त सैनिक भी मिडिल ईस्ट भेजे गए हैं. इस नई तैनाती के साथ मिडिल ईस्ट में अमेरिकी सैनिकों की संख्या 50 हजार हो गई है. अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में एयर डिफेंस यानी हवाई रक्षा प्रणालियों की तादाद बढ़ाकर 40 कर दी है . इनके साथ ही साथ अमेरिका ने 500 से ज्यादा अंडरवॉटर ड्रोन भी तैनात किए हैं. होर्मुज में अंडरवॉटर ड्रोन किए गए तैनात अंडरवॉटर ड्रोन यानी पानी की सतह के नीचे चलने वाले ड्रोन की तैनाती ने एक बात साफ कर दी है. ट्रंप के वॉर प्लान में एक बड़ा मकसद होर्मुज को खोलना भी होगा. होर्मुज में ईरान ने छोटी पनडुब्बियां तैनात कर रखी हैं. इसी वजह से अमेरिकी नौसेना ने ईरानी पनडुब्बियों को तबाह करने के लिए अंडरवॉटर ड्रोन तैनात किए हैं. इस विश्लेषण की शुरुआत में हमने आपको आचार्य चाणक्य के मंडल सिद्धांत के बारे में बताया था. ये सिद्धांत कहता है कि युद्ध में जो कमजोर होता है वो शांति के प्रयासों पर ज्यादा जोर देता है. कुछ ऐसा ही ईरान कर रहा है. ईरान ने अमेरिका को संशोधित प्रस्ताव भेज दिया था. अब ट्रंप के दूत यानी पाकिस्तानी फील्ड मार्शल आसिम मुनीर को भी ईरान ने बुला लिया है. ईरान में मुनीर ने सबसे पहले संसद के स्पीक मोहम्मद गलिबाफ से मुलाकात की है. इस मुलाकात से ट्रंप के फेवरेट फील्ड मार्शल को क्या हासिल हुआ है. ये जानना भी बेहद जरूरी है. #DNAमित्रों | ट्रंप की छुट्टी रद्द..सेना की छुट्टी रद्द..बेटे की शादी में क्यों नहीं जा रहे ट्रंप? ट्रंप के वॉर प्लान का DNA विश्लेषण#DNA #DNAWithRahulSinha #America #DonaldTrump @RahulSinhaTV pic.twitter.comKIcpvb0DlX — Zee News (@ZeeNews) May 23, 2026 गलिबाफ ने मुनीर को बताया है कि ईरान की मूल शर्तों में कोई बदलाव नहीं हुआ है. गलिबाफ ने ये भी कहा है कि ईरान की सेना ने दोबारा अपनी क्षमता को बढ़ा लिया है. गलिबाफ ने तीसरी बड़ी बात ये कही है कि अगर ईरान पर हमला हुआ तो मिडिल ईस्ट में सबको बहुत बड़ा नुकसान होगा. यानी सीधे शब्दों में मुनीर को बता दिया गया है कि ईरान बातचीत के लिए तैयार है लेकिन वो उन शर्तों पर नहीं झुकेगा जिन्हें ईरान नाजायज मानता है. पाकिस्तान हुआ फेल तो कतर को दिखा मौका ईरान ने अपना मत बताया है और मुलाकात के नतीजों ने ये बताया है कि मुनीर इस बार भी स्थायी युद्धविराम के लिए सही माहौल नहीं बना पाया है. सीजफायर का क्रेडिट लूटने के लिए मुनीर और शहबाज इस युद्ध में कूद तो गए लेकिन उनके पास कोई समाधान नहीं है. पाकिस्तान के पास ना तो वो आर्थिक कद है जो अपनी बातों को मनवा सके. पाकिस्तान के पास वो सैन्य शक्ति भी नहीं है जिसकी वजह से दोनों पक्ष पीछे हटें. मुनीर और शहबाज की इस नाकामी के बीच एक और किरदार सक्रिय हुआ है और वह है कतर. कतर के प्रतिनिधियों ने ईरान के प्रतिनिधियों से बातचीत की है. ईरान से बातचीत से पहले कतर के प्रतिनिधियों ने अमेरिकी उप राष्ट्रपति जे डी वैंस से भी मुलाकात की थी. कतर ने दोनों पक्षों को एक ही बात कही है. दोनों पक्ष युद्ध को रोकें ताकि होर्मुज से आवाजाही दोबारा शुरु की जा सके. कतर ने ये भी कहा है दोनों पक्ष शर्तों को लेकर लचीला रुख रखेंगे तो समाधान तक पहुंचा जा सकता है. ट्रंप का बढ़ता जा रहा जंगी जुनून पाकिस्तान फेल हो चुका है. कतर अब भी कोशिशें कर रहा है और इस सबके बीच ट्रंप का जुनूनी एजेंडा लगातार आगे बढ़ रहा है. जब बातचीत चल रही थी तो ट्रंप ने सोशल मीडिया पर मिडिल ईस्ट का एक नया नक्शा जारी कर दिया. इस नक्शे में ईरान पर अमेरिका का झंडा लगाया गया है. यानी ट्रंप ने दोबारा ईरान को धमकाया और उकसाया है. ऐसे ही आक्रामक बर्ताव को लेकर प्राचीन ग्रीस के दार्शनिक हेराक्लाइटस ने कहा था - जो युद्ध करना चाहता है उसे कोई नहीं रोक सकता, दुनिया का हर युद्ध या तो इच्छाशक्ति या फिर स्वभाव का परिणाम होता है. अब दुनिया को डीकोड करना होगा कि ट्रंप की जंगी तैयारियां उनकी इच्छाशक्ति का परिणाम है या फिर उनके बेकाबू स्वभाव का.
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