होर्मुज संकट से खाद की कीमतों में वृद्धि, सरकार पर वित्तीय दबाव
महंगाई की मार: होर्मुज संकट से खाद की कीमतें बढ़ीं, सरकार पर वित्तीय दबाव और राजकोषीय घाटे का खतरा
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Image: Jagran
होर्मुज जलडमरूमध्य में संकट के कारण खाद की वैश्विक कीमतों में 70-75% तक वृद्धि हुई है, जिससे भारत की खाद सब्सिडी बढ़कर 3.5 लाख करोड़ रुपये तक पहुँच सकती है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस पर चिंता जताई है।
- 01खाद की वैश्विक कीमतें पिछले दो महीनों में 70-75% तक बढ़ी हैं।
- 02भारत में खाद की 50% जरूरत आयात से पूरी होती है।
- 03चालू वित्त वर्ष में खाद सब्सिडी का आवंटन 1.7 लाख करोड़ रुपये था, जो संकट के कारण 3 लाख करोड़ रुपये को पार कर सकता है।
- 04ईरान-अमेरिका युद्ध के कारण खाद की कीमतों में वृद्धि हो रही है।
- 05सरकार नैनो यूरिया के उपयोग को बढ़ावा देकर आयात बिल में कमी लाने का प्रयास कर रही है।
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भारत में होर्मुज जलडमरूमध्य के संकट के कारण खाद की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं, जो पिछले दो महीनों में 70-75% तक पहुँच गई हैं। इस स्थिति ने सरकार पर वित्तीय दबाव डाला है, क्योंकि देश की खाद की 50% जरूरत आयात से पूरी होती है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने खाद पर नजर रखने की आवश्यकता को रेखांकित किया है। चालू वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में खाद सब्सिडी के लिए 1.7 लाख करोड़ रुपये का आवंटन किया गया था, जो अब संकट के चलते 3 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो सकता है। जानकारों का अनुमान है कि यदि संकट जारी रहा, तो यह सब्सिडी 3.5 लाख करोड़ रुपये तक पहुँच सकती है। इसके परिणामस्वरूप राजकोषीय घाटा बढ़ने का खतरा है। सरकार आयात की बढ़ती कीमतों का बोझ किसानों पर नहीं डालना चाहती, जिससे खाद्य पदार्थों की कीमतें और बढ़ सकती हैं। नैनो यूरिया के उपयोग को बढ़ाकर आयात को कम करने का प्रयास किया जा रहा है।
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खाद की बढ़ती कीमतें किसानों की आर्थिक स्थिति पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती हैं और खाद्य पदार्थों की महंगाई बढ़ा सकती हैं।
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