ईरान संकट के बीच भारत के निर्यात को बढ़ाने के लिए जरूरी कदम
टैरिफ से ज्यादा बड़ा है ईरान संकट, निर्यात बढ़ाने के लिए उठाने होंगे 2 बड़े कदम, वरना खत्म हो जाएगी इस साल की बढ़त

Image: News 18 Hindi
भारत के निर्यातकों को ईरान संकट से अधिक नुकसान हो सकता है। 'थिंक चेंज फोरम' की रिपोर्ट के अनुसार, निर्यात प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के लिए टैरिफ में नरमी और आयात प्रबंधन जैसे उपायों की आवश्यकता है। वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का व्यापार घाटा 333 अरब डॉलर रहा।
- 01भारत का वस्तु आयात वित्त वर्ष 2025-26 में 774.98 अरब डॉलर था, जबकि निर्यात 441.78 अरब डॉलर रहा।
- 02रिपोर्ट में आयात प्रबंधन और संरचनात्मक करों में कमी की आवश्यकता बताई गई है।
- 03डंपिंग-रोधी अनुशंसाओं को खारिज करने की दर नवंबर-दिसंबर 2025 में 81% तक पहुंच गई।
- 04महंगी वस्तुओं जैसे सिगरेट और लग्ज़री कारों के आयात को सीमित करने का सुझाव दिया गया है।
- 05पारंपरिक सब्सिडी उपाय अब टिकाऊ नहीं हैं और संरचनात्मक सुधारों की आवश्यकता है।
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नई दिल्ली में 'थिंक चेंज फोरम' की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि ईरान का मौजूदा संकट भारतीय निर्यातकों को टैरिफ से अधिक नुकसान पहुंचा सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत को अपनी निर्यात प्रतिस्पर्धा को बढ़ाने के लिए कुछ महत्वपूर्ण कदम उठाने की आवश्यकता है, जैसे कि टैरिफ में नरमी और गैर-जरूरी आयात पर अंकुश। वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का वस्तु आयात 774.98 अरब डॉलर और निर्यात 441.78 अरब डॉलर रहा, जिससे व्यापार घाटा 333 अरब डॉलर हो गया। रिपोर्ट में डंपिंग-रोधी अनुशंसाओं की खारिज दर में वृद्धि का भी उल्लेख किया गया है, जो 1991-2020 के दौरान केवल 0.5% थी, लेकिन अब बढ़कर 81% हो गई है। यह घरेलू उद्योगों के लिए संरक्षण नीति पर सवाल उठाता है। आयात प्रबंधन के उपायों के तहत महंगी वस्तुओं के आयात को सीमित करने की आवश्यकता है, जिससे विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम किया जा सके।
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अगर आयात प्रबंधन और करों में कमी जैसे उपाय नहीं उठाए गए, तो भारतीय निर्यातकों को और अधिक नुकसान हो सकता है, जिससे घरेलू उद्योगों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
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