भारत को पश्चिम एशिया संकट के बीच गैर-जरूरी आयात पर रोक लगाने की सलाह
पश्चिम एशिया संकट: भारत को रोकना होगा गैर-जरूरी आयात, एक्सपर्ट्स ने दी सलाह

Image: Jagran
पश्चिम एशिया संकट के कारण भारत को आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि गैर-जरूरी वस्तुओं के आयात पर रोक और करों में कमी से स्थिति को संभाला जा सकता है। प्रधानमंत्री मोदी ने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए आवश्यक बताया।
- 01थिंक चेंज फोरम (टीसीएफ) की रिपोर्ट में कहा गया है कि वैश्विक आर्थिक परिदृश्य तनाव में है।
- 02भारत को आयात में कमी और कारोबार सुधारों को लागू करने की आवश्यकता है।
- 03गैर-जरूरी सामानों का आयात कम करना अब केवल मितव्ययिता का उपाय नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा का आधार है।
- 042025-26 में भारत का वस्तु आयात 774.98 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है।
- 05भारत का व्यापार घाटा 333 अरब डॉलर से अधिक होने की संभावना है।
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पश्चिम एशिया संकट ने भारत के सामने कई आर्थिक चुनौतियाँ खड़ी कर दी हैं। थिंक चेंज फोरम (टीसीएफ) की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस संकट से निपटने के लिए भारत को करों में कमी और गैर-जरूरी वस्तुओं के आयात पर रोक लगानी होगी। रिपोर्ट में कहा गया है कि वैश्विक आर्थिक परिदृश्य गंभीर तनाव में है, जिससे ऊर्जा, कृषि और मैन्यूफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में लागत जनित महंगाई बढ़ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि सब्सिडी पर निर्भर रहना अब टिकाऊ नहीं है, और इसे खत्म करके भारत को अपने घरेलू औद्योगिक आधार को सुरक्षित करना होगा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी इस बात पर जोर दिया है कि गैर-जरूरी सामानों का आयात कम करना केवल एक मितव्ययिता का उपाय नहीं है, बल्कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेशी मुद्रा की मजबूती का एक महत्वपूर्ण पहलू है। वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 2025-26 में भारत का वस्तु आयात 774.98 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है, जबकि निर्यात 441.78 अरब डॉलर रहने की संभावना है, जिससे व्यापार घाटा 333 अरब डॉलर से अधिक हो सकता है।
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भारत की अर्थव्यवस्था पर पश्चिम एशिया संकट का गहरा प्रभाव पड़ रहा है, जिससे आयात में कमी और घरेलू उद्योग को बढ़ावा देने की आवश्यकता है।
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