आईआईटी की चेतावनी: गाजर से मिलावट कर नकली घी बनाना बढ़ा खतरा
गाजर से नकली घी बन रहा असली! IIT ने दी ये चेतावनी

Image: Aaj Tak
आईआईटी बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि गाजर के पिगमेंट का इस्तेमाल कर पाम ऑयल या सूअर की चर्बी को असली गाय के घी के समान बनाया जा सकता है। यह नकली घी लैब टेस्ट को भी धोखा दे सकता है, जिससे स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो सकता है।
- 01आईआईटी के शोधकर्ताओं ने गाजर के पिगमेंट का उपयोग कर नकली घी बनाने की प्रक्रिया का खुलासा किया।
- 02पाम ऑयल और सूअर की चर्बी को गाजर के रंग से मिलाकर असली घी जैसा दिखाया जा सकता है।
- 03रमन स्पेक्ट्रोस्कोपी जैसे टेस्ट भी इस मिलावट को पहचानने में असफल हो रहे हैं।
- 04गाजर का अर्क मिलाने से घी का रंग बदलकर असली जैसा दिख सकता है, लेकिन इसका स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव हो सकता है।
- 05शोधकर्ताओं ने इस रिसर्च को टेस्टिंग सिस्टम की कमजोरी उजागर करने के लिए किया है।
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आईआईटी बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने एक नई रिसर्च में बताया है कि गाजर के पिगमेंट (बीटा-कैरोटीन) का इस्तेमाल करके मिलावटखोर पाम ऑयल या सूअर की चर्बी को असली गाय के घी जैसा बना सकते हैं। यह नकली घी लैब टेस्ट को भी धोखा दे सकता है, जिससे स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो सकता है। आमतौर पर, खाद्य नियामक गाय के घी की शुद्धता की जांच के लिए रमन स्पेक्ट्रोस्कोपी का उपयोग करते हैं, लेकिन शोधकर्ताओं ने पाया कि गाजर का अर्क मिलाकर पाम ऑयल और चर्बी में वही सिग्नल उत्पन्न किए जा सकते हैं जो असली घी में होते हैं। वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि इस प्रकार की मिलावट से लोगों की सेहत पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने सुझाव दिया है कि केवल एक टेस्ट पर निर्भर रहने से बाजार में नकली घी की समस्या बढ़ सकती है।
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नकली घी की बिक्री से लोगों की स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो सकता है।
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