बीएचयू के शोध से खुलासा: 57,000 साल पहले अफ्रीका से श्रीलंका पहुंचे मानव
बीएचयू का डीएनए टेस्ट: 57000 साल पहले अफ्रीका से निकले मानव श्रीलंका पहुंचे, तब भी था रामसेतु; खास खुलासा
Amar Ujala
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एक नए अध्ययन के अनुसार, 57,000 साल पहले मानव जाति अफ्रीका से श्रीलंका पहुंची थी। इस अध्ययन में माइटोकॉन्ड्रियल डीएनए का उपयोग किया गया और यह पुष्टि हुई कि तब रामसेतु भी मौजूद था। यह शोध बीएचयू और अन्य संस्थानों के वैज्ञानिकों द्वारा किया गया है।
- 01अफ्रीका से मानव जाति का जत्था हिंद महासागर के तट के सहारे श्रीलंका पहुंचा।
- 02शोध में 139 नए जीनोम का सीक्वेंस किया गया।
- 03बीएचयू के प्रो. ज्ञानेश्वर चौबे ने अध्ययन का नेतृत्व किया।
- 04शोध में सिंहली, श्रीलंकाई तमिल और वेद्दा समुदायों के पूर्वजों का अध्ययन किया गया।
- 05शोध का निष्कर्ष 'कोस्टल रूट' के माध्यम से मानव प्रवास की पुष्टि करता है।
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वाराणसी के बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) और श्रीलंका के कोलंबो विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने एक महत्वपूर्ण अध्ययन में खुलासा किया है कि 57,000 साल पहले मानव जाति अफ्रीका से निकलकर श्रीलंका पहुंची थी। यह अध्ययन अंतरराष्ट्रीय जर्नल 'प्लॉस वन' में प्रकाशित हुआ है। इस शोध में माइटोकॉन्ड्रियल डीएनए का उपयोग किया गया, जो केवल माताओं से संतानों में जाता है। प्रमुख शोधकर्ता प्रो. ज्ञानेश्वर चौबे ने बताया कि इस अध्ययन में सिंहली, श्रीलंकाई तमिल और वेद्दा समुदायों के पूर्वजों के श्रीलंका में प्रवेश का अध्ययन किया गया। वैज्ञानिकों ने 139 नए जीनोम का सीक्वेंस किया और यह पाया कि मानव जाति ने हिंद महासागर के तट के सहारे श्रीलंका तक पहुंचने के लिए 'कोस्टल रूट' का उपयोग किया। इस समय समुद्री स्तर वर्तमान से काफी कम था, और तब भी भारत और श्रीलंका के बीच रामसेतु (जमीनी पुल) मौजूद था।
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इस शोध से मानव प्रवास के इतिहास को समझने में मदद मिलेगी, जो स्थानीय समुदायों की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान को प्रभावित कर सकती है।
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