भारत में महिला श्रम भागीदारी में वृद्धि, वेतन में अभी भी पुरुषों से बड़ा अंतर
श्रम बाजार में बढ़ी महिलाओं की भागीदारी, लेकिन वेतन में पुरुषों से अब भी बड़ा अंतर
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राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय की नई रिपोर्ट के अनुसार, भारत में महिलाओं की श्रम भागीदारी 2022 के 33.9 प्रतिशत से बढ़कर 2025 में 40 प्रतिशत हो गई है। हालांकि, महिलाओं का वेतन अभी भी पुरुषों की तुलना में कम है, जो लैंगिक भेदभाव का संकेत है।
- 01महिला श्रम भागीदारी दर 2025 में 40 प्रतिशत होने का अनुमान
- 02ग्रामीण महिलाओं की भागीदारी में सबसे अधिक वृद्धि
- 03महिलाओं का वेतन पुरुषों की तुलना में कम, 34 प्रतिशत का अंतर
- 04युवाओं में बेरोजगारी दर शहरी महिलाओं के लिए 18.9 प्रतिशत
- 05महिला-प्रधान स्वामित्व वाले उद्यमों में वृद्धि
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राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में महिलाओं की श्रम भागीदारी 2022 के 33.9 प्रतिशत से बढ़कर 2025 में 40 प्रतिशत होने की उम्मीद है। यह वृद्धि मुख्य रूप से ग्रामीण महिलाओं के कारण हुई है, जिनकी भागीदारी दर 45.9 प्रतिशत तक पहुंच गई है। हालांकि, पुरुषों की भागीदारी दर 79.1 प्रतिशत है, जिससे लैंगिक भेदभाव स्पष्ट होता है। वेतन के मामले में, पुरुष दिहाड़ी मजदूरों को 435 रुपये और महिलाएं 305 रुपये प्रतिदिन कमाती हैं, जो लगभग 34 प्रतिशत का अंतर है। शहरी युवा महिलाओं में बेरोजगारी दर 18.9 प्रतिशत है, जो पुरुषों की 11.8 प्रतिशत से अधिक है। सकारात्मक बदलाव के रूप में, महिला-प्रधान स्वामित्व वाले उद्यमों की संख्या में वृद्धि हुई है, जो 2023-24 में असंगठित क्षेत्र में 26.2 प्रतिशत है।
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महिलाओं की बढ़ती श्रम भागीदारी और उद्यमिता से ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा।
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