Labour Day: भारत के मजदूरों की कठिनाइयों और कमाई के आंकड़े
Labour Day: सबसे ज्यादा काम, सबसे कम दाम... ये आंकड़े बताते हैं किस हाल में हैं देश के मजदूर
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1 मई को मनाए जाने वाले मजदूर दिवस पर, भारत में मजदूरों की स्थिति चिंताजनक है। 2021 की ग्लोबल स्लेवरी इंडेक्स रिपोर्ट के अनुसार, 1.10 करोड़ लोग 'आधुनिक गुलामी' में जी रहे हैं। भारतीय मजदूरों की औसत कमाई अन्य देशों की तुलना में बहुत कम है, जबकि वे अधिक घंटे काम करते हैं।
- 01भारत में 1.10 करोड़ लोग 'आधुनिक गुलामी' में जी रहे हैं।
- 02एक भारतीय औसतन हफ्ते में 45.5 घंटे काम करता है।
- 03भारतीयों की प्रति घंटा औसत कमाई $4.63 (लगभग ₹440) है।
- 0490% से अधिक मजदूर असंगठित क्षेत्रों में काम करते हैं।
- 0594 करोड़ से ज्यादा भारतीयों को सरकार की सामाजिक सुरक्षा मिली हुई है।
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1 मई को मजदूर दिवस के अवसर पर, भारत में मजदूरों की स्थिति पर ध्यान केंद्रित किया गया है। 1889 में मजदूरों के अधिकारों के लिए इस दिन को चुना गया था, और भारत में इसे 1923 से मनाया जा रहा है। आज भी, भारत में 1.10 करोड़ से अधिक लोग 'आधुनिक गुलामी' में जी रहे हैं, जहां उन्हें जबरदस्ती काम कराया जाता है और उचित मेहनताना नहीं मिलता। अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) के अनुसार, एक भारतीय औसतन 45.5 घंटे काम करता है, जबकि 51% भारतीय हफ्ते में 49 घंटे से अधिक काम करते हैं। इसके विपरीत, ब्रिटेन में औसत काम का समय 34.9 घंटे और अमेरिका में 43.49 डॉलर (लगभग ₹4,126) प्रति घंटे की औसत कमाई है। भारतीय मजदूरों की औसत कमाई केवल ₹22,699 प्रति माह है। इसके अलावा, 90% से अधिक मजदूर असंगठित क्षेत्रों में काम करते हैं, जिससे उन्हें कोई सुरक्षा नहीं मिलती। हालांकि, अच्छी बात यह है कि 94 करोड़ से अधिक भारतीयों को सरकार द्वारा सामाजिक सुरक्षा प्रदान की जा रही है।
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मजदूरों की स्थिति में सुधार से उनके जीवन स्तर में वृद्धि हो सकती है, जिससे समाज में आर्थिक समृद्धि आएगी।
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