भारत की ऊर्जा सुरक्षा: होर्मुज पर निर्भरता कम करने की आवश्यकता
विचार: होर्मुज पर निर्भरता घटाने का समय
Jagran
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भारत को होर्मुज जलमार्ग पर अपनी निर्भरता कम करने की आवश्यकता है, क्योंकि यह वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा को खतरे में डालता है। यदि यह मार्ग बाधित होता है, तो कच्चे तेल की कीमतें 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं, जिससे भारत का आयात बिल बढ़ेगा और रुपये की वैल्यू प्रभावित होगी।
- 01होर्मुज जलमार्ग पर निर्भरता कम करना भारत के लिए अनिवार्यता है।
- 02कच्चे तेल की कीमतें 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं।
- 03चाबहार बंदरगाह भारत के लिए एक महत्वपूर्ण रणनीतिक विकल्प है।
- 04गैस पाइपलाइन परियोजना ओमान तक भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करेगी।
- 05भारत को अक्षय ऊर्जा पर ध्यान केंद्रित करना होगा।
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डॉ. सुरजीत सिंह के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच तनावपूर्ण संबंधों के कारण होर्मुज जलमार्ग पर निर्भरता भारत के लिए खतरा बन गई है। यह जलमार्ग वैश्विक समुद्री तेल व्यापार का लगभग एक-तिहाई हिस्सा संभालता है, और किसी भी तनाव से कच्चे तेल की कीमतें 150 डॉलर प्रति बैरल तक बढ़ सकती हैं। इससे भारत का आयात बिल बढ़ेगा और रुपये की वैल्यू पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। भारत को अपने ऊर्जा और व्यापारिक मार्गों का विविधीकरण करना होगा, और चाबहार बंदरगाह इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह बंदरगाह भारत को अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक सीधी पहुंच प्रदान करता है। इसके अलावा, भारत ओमान तक गहरे समुद्र के रास्ते गैस पाइपलाइन बिछाने की योजना बना रहा है, जो होर्मुज जलमार्ग और पाकिस्तान को बायपास करेगी। भारत को अपनी ऊर्जा सुरक्षा के लिए एक बहुस्तरीय योजना पर काम करना होगा, जिसमें अक्षय ऊर्जा पर ध्यान केंद्रित करना भी शामिल है।
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यदि होर्मुज जलमार्ग बाधित होता है, तो कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि से भारत का आयात बिल बढ़ेगा, जिससे रुपये की वैल्यू प्रभावित होगी और घरेलू उपभोक्ताओं के लिए ईंधन महंगा हो सकता है।
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