सिंगुर की राजनीतिक स्थिति: 18 साल बाद भी कारखाना नहीं, जमीन बंजर
बंगाल चुनाव: पछतावे और नए वादे के बीच लटकता सिंगुर, कारखाना लगा नहीं, जमीन भी हो गई बंजर
Jagran
Image: Jagran
सिंगुर, हुगली जिले, पश्चिम बंगाल में टाटा मोटर्स द्वारा नैनो कार कारखाने के लिए अधिग्रहित भूमि अब बंजर हो चुकी है। स्थानीय निवासी रोजगार की कमी और राजनीतिक वादों से निराश हैं, जबकि कुछ लोग अपनी जमीन वापस पाकर संतुष्ट हैं।
- 01सिंगुर में टाटा मोटर्स का कारखाना 18 साल पहले बंद हुआ था।
- 02अधिग्रहित भूमि अब कृषि के लिए अनुपयुक्त हो गई है।
- 03स्थानीय लोग रोजगार की कमी से जूझ रहे हैं।
- 04कुछ लोग अपनी जमीन वापस पाकर संतुष्ट हैं।
- 05चुनाव में विभिन्न दलों के नेता प्रचार कर रहे हैं।
Advertisement
In-Article Ad
सिंगुर, हुगली जिले, पश्चिम बंगाल में टाटा मोटर्स द्वारा नैनो कार कारखाने के लिए अधिग्रहित भूमि अब बंजर हो चुकी है। 18 साल पहले कारखाने के बंद होने के बाद, स्थानीय निवासी केवल पछतावे के साथ रह गए हैं। चंदन पाल जैसे किसान, जिन्होंने अपनी भूमि दी थी, अब निराश हैं क्योंकि उनकी जमीन कृषि के लिए अनुपयुक्त हो गई है। अन्य स्थानीय लोग, जैसे शंकर ज्योत, रोजगार की कमी से जूझते हुए कोलकाता की ओर पलायन कर रहे हैं। हालांकि, कुछ लोग जैसे तारापद दास, अपनी जमीन वापस पाकर संतुष्ट हैं और सरकार से मिलने वाली सहायता का लाभ उठा रहे हैं। चुनावी मौसम में, विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता सिंगुर में प्रचार कर रहे हैं, लेकिन स्थानीय लोगों के मन में रोजगार की कमी और खोई हुई जमीन की चिंता बनी हुई है।
Advertisement
In-Article Ad
सिंगुर के निवासियों को रोजगार की कमी का सामना करना पड़ रहा है, जिससे पलायन और आर्थिक कठिनाइयाँ बढ़ रही हैं।
Advertisement
In-Article Ad
Reader Poll
क्या आपको लगता है कि सिंगुर में रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए सरकार को कदम उठाने चाहिए?
Connecting to poll...
मूल लेख पढ़ें
पूरी कहानी के लिए मूल स्रोत पर जाएं।




