अपशिष्ट जल का औद्योगिक उपयोग: एक मूल्यवान संसाधन के रूप में शोधित पानी की भूमिका
अपशिष्ट जल बना मूल्यवान संसाधन, उद्योगों में हो रहा शोधित पानी का उपयोग

Image: Jagran
भारत में अपशिष्ट जल को अब एक संसाधन के रूप में देखा जा रहा है, जिसका उपयोग औद्योगिक कार्यों में किया जा रहा है। राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन ने बताया कि शोधित सीवेज का उपयोग मीठे पानी के स्थान पर किया जा रहा है, जिससे जल की बर्बादी को रोका जा रहा है।
- 01राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) ने अपशिष्ट जल को एक संसाधन के रूप में मान्यता दी है।
- 02शोधित अपशिष्ट जल का उपयोग औद्योगिक कार्यों में मीठे पानी के स्थान पर किया जा रहा है।
- 03ट्रांस यमुना सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से प्रतिदिन 80 लाख लीटर शोधित जल मथुरा रिफाइनरी को भेजा जा रहा है।
- 04शोधित जल का उपयोग पावर प्लांट्स और निर्माण स्थलों पर किया जा रहा है।
- 05एनएमसीजी ने अपशिष्ट जल के पुनः उपयोग के लिए एक राष्ट्रीय ढांचा स्थापित किया है।
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भारत में अपशिष्ट जल को अब केवल निपटान की समस्या के रूप में नहीं, बल्कि एक मूल्यवान संसाधन के रूप में देखा जा रहा है। राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) ने बताया है कि शोधित अपशिष्ट जल का औद्योगिक और गैर-पेय कार्यों में तेजी से उपयोग किया जा रहा है। इस मिशन ने सीवेज को एक उप-उत्पाद के बजाय संसाधन के रूप में स्थापित किया है। एनएमसीजी के अनुसार, शोधित जल का उपयोग पावर प्लांट्स में टर्बाइन को ठंडा करने, निर्माण स्थलों पर कंक्रीट मिलाने और कृषि में सिंचाई के लिए किया जा रहा है। उदाहरण के लिए, ट्रांस यमुना सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से प्रतिदिन 80 लाख लीटर शोधित जल मथुरा रिफाइनरी को भेजा जा रहा है। दिल्ली में प्रगति पावर कारपोरेशन और झारखंड में जोजोबेरा थर्मल पावर प्लांट भी शोधित जल का पुनः उपयोग कर रहे हैं।
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शोधित जल का उपयोग औद्योगिक कार्यों में मीठे पानी की बर्बादी को रोकता है, जिससे जल संसाधनों का संरक्षण होता है।
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