म्युचुअल फंड बाजार में ऐक्टिव इक्विटी फंडों की हिस्सेदारी में गिरावट
म्युचुअल फंड बाजार में बड़ा बदलाव, कोविड के बाद पहली बार ऐक्टिव इक्विटी फंडों की हिस्सेदारी घटी
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वित्त वर्ष 2026 में म्युचुअल फंड बाजार में ऐक्टिव इक्विटी फंडों की हिस्सेदारी 44.8% से घटकर 43.4% हो गई है। कोविड के बाद पहली बार यह गिरावट आई है, जबकि पैसिव फंडों की हिस्सेदारी बढ़ी है। यह बदलाव शेयर बाजारों के सुस्त प्रदर्शन और कीमती धातुओं की कीमतों में वृद्धि के बीच आया है।
- 01वित्त वर्ष 2026 में ऐक्टिव इक्विटी फंडों की हिस्सेदारी 43.4% हो गई।
- 02पैसिव फंडों की हिस्सेदारी 14% से बढ़कर 19% हो गई।
- 03एसआईपी निवेश वित्त वर्ष 2026 में 3.5 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचा।
- 04एकमुश्त निवेश कमजोर रहा, जबकि एसआईपी का निवेश बढ़ा।
- 05शेयर बाजारों के सुस्त प्रदर्शन ने ऐक्टिव इक्विटी फंडों की वृद्धि को प्रभावित किया।
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कोविड-19 के बाद म्युचुअल फंडों में ऐक्टिव इक्विटी योजनाओं को काफी लाभ हुआ था, लेकिन वित्त वर्ष 2026 में पहली बार इनकी हिस्सेदारी में गिरावट आई है। एसोसिएशन ऑफ म्युचुअल फंड्स इन इंडिया (एम्फी) के आंकड़ों के अनुसार, मार्च 2025 में ऐक्टिव इक्विटी फंडों का हिस्सा 44.8% से घटकर मार्च 2026 में 43.4% हो गया। इस दौरान हाइब्रिड योजनाओं और पैसिव फंडों का हिस्सा बढ़ा, जबकि डेट फंडों में गिरावट का सिलसिला जारी रहा। पैसिव फंडों की हिस्सेदारी 14% से बढ़कर 19% से अधिक हो गई, जिसे गोल्ड और सिल्वर एक्सचेंज ट्रेडेड फंडों (ईटीएफ) की सफलता ने बढ़ावा दिया। वित्त वर्ष 2026 में एसआईपी के माध्यम से निवेश में 8.6% की बढ़ोतरी हुई, जिससे कुल एसआईपी निवेश 3.5 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया।
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यह बदलाव निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि ऐक्टिव इक्विटी फंडों में निवेश की कमी से उनके रिटर्न प्रभावित हो सकते हैं।
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