पेट्रोल-डीजल की कीमतों में संभावित बढ़ोतरी, कंपनियों को हो रहा ₹30,000 करोड़ का घाटा
पेट्रोल-डीजल की कीमतों में लग सकती है आग, तेल कंपनियों को हर महीने हो रहा ₹30,000 करोड़ का घाटा
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पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है। सरकारी तेल कंपनियों को हर महीने ₹30,000 करोड़ का घाटा हो रहा है, जिससे उनकी वित्तीय स्थिति पर दबाव बढ़ रहा है।
- 01कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि से पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ने की संभावना है।
- 02सरकारी तेल कंपनियों को हर महीने ₹30,000 करोड़ का घाटा हो रहा है।
- 03विशेषज्ञों का मानना है कि कीमतों में 20% की बढ़ोतरी जरूरी है।
- 04राज्यों में चुनावों के बाद ईंधन की खुदरा कीमतें 25 से 28 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ सकती हैं।
- 05सरकार ने कीमतों को स्थिर रखने की कोशिश की है, लेकिन स्थिति बिगड़ रही है।
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पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि हो रही है, जिससे भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना बढ़ गई है। सरकारी तेल मार्केटिंग कंपनियों को हर महीने ₹30,000 करोड़ का घाटा हो रहा है, जो उनकी वित्तीय स्थिति पर भारी दबाव डाल रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि वर्तमान में कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से अधिक हो गई हैं, और इस स्थिति में पेट्रोल और डीजल के दाम में 20% की बढ़ोतरी आवश्यक है। हालांकि, कीमतों में इतनी बड़ी बढ़ोतरी की संभावना कम है। कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि चुनावों के बाद कुछ राज्यों में ईंधन की खुदरा कीमतें 25 से 28 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ सकती हैं। सरकार ने कीमतों को स्थिर रखने की कोशिश की है, लेकिन हालात बिगड़ने के कारण अब यह स्थिति चुनौतीपूर्ण होती जा रही है।
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यदि पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ती हैं, तो आम लोगों के लिए परिवहन और अन्य आवश्यक सेवाओं की लागत बढ़ जाएगी।
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