साकेत हादसे में छात्रों की दर्दनाक कहानियाँ: मलबे में दबे साथी की पहचान घड़ी से हुई
'किसी को घड़ी से पहचाना तो किसी को आवाज से...', साकेत हादसे में छात्रों ने बयां किया दर्द

Image: Jagran
साकेत, नई दिल्ली में एक इमारत के ढहने से छात्रों में अफरा-तफरी मच गई। कई छात्रों ने अपने अनुभव साझा किए, जिसमें एक छात्र को मलबे से निकालने के लिए उसकी घड़ी की पहचान की गई। इस हादसे में कैंटीन की मालकिन पार्वती ओझा की जान चली गई।
- 01हादसे के समय कैंटीन में 20-25 छात्र मौजूद थे, जब इमारत अचानक गिर गई।
- 02एक छात्र ने अपने मित्रों को पहचानने के लिए मलबे में से निकले हाथ को देखा, जिसमें घड़ी बंधी थी।
- 03कैंटीन की मालकिन पार्वती ओझा ने छात्रों को सचेत करने के लिए वापस अंदर जाने की कोशिश की, लेकिन उनकी जान चली गई।
- 04घटनास्थल पर छात्रों ने एक-दूसरे को खोजने के लिए मलबे में फोन किए और नाम पुकारे।
- 05एक छात्र ने बताया कि उन्हें पहले लगा कि यह सामान्य कंपन है, लेकिन अचानक इमारत गिर गई।
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नई दिल्ली के साकेत में एक इमारत के ढहने से छात्रों में हड़कंप मच गया। घटना के समय, वेस्ट इंड मार्ग पर स्थित एक कैंटीन में कई छात्र मौजूद थे। अचानक आई तेज आवाज और धूल के गुबार ने सबको दहशत में डाल दिया। छात्रों ने बताया कि इमारत के गिरने से पहले उन्हें हल्की कंपन का अनुभव हुआ, जिसे वे सामान्य समझ रहे थे। जब इमारत गिरी, तो छात्र भागने लगे, लेकिन कई मलबे में दब गए। एक छात्र क्षितिज प्रताप को उसके मित्रों ने उसकी घड़ी की पहचान से मलबे से निकाला। कैंटीन की मालकिन पार्वती ओझा ने छात्रों को बचाने की कोशिश की, लेकिन उनकी जान चली गई। इस हादसे में कई छात्रों को गंभीर चोटें आईं, और वे अपने साथियों को खोजने के लिए मलबे में लौटे। यह घटना छात्रों के लिए एक भयानक अनुभव बन गई।
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इस हादसे ने छात्रों और उनके परिवारों पर गहरा असर डाला है, जिससे सुरक्षा मानकों पर सवाल उठते हैं।
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