हिमाचल प्रदेश में आउटसोर्स कर्मियों के लिए नई नीति बनाने की प्रक्रिया शुरू
हिमाचल: आउटसोर्स कर्मियों के लिए नीति बनाने की तैयारी, मुख्यमंत्री सुक्खू ने मांगा प्रस्ताव
Amar Ujala
Image: Amar Ujala
हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने आउटसोर्स कर्मियों के लिए नीति बनाने की प्रक्रिया शुरू की है। इन कर्मियों को 15 से 20 वर्षों से कम वेतन और भविष्य की सुरक्षा के बिना काम करना पड़ रहा है। सरकार ने उनकी सेवा शर्तों की समीक्षा करने का निर्णय लिया है।
- 01मुख्यमंत्री ने आउटसोर्स कर्मियों के लिए नीति बनाने की प्रक्रिया शुरू की है।
- 02कर्मियों को 15 से 20 वर्षों से कम वेतन मिल रहा है।
- 03कर्मियों की सुरक्षा और भविष्य की सुनिश्चितता की मांग की जा रही है।
- 04सरकार ने सेवा शर्तों की समीक्षा करने का निर्णय लिया है।
- 05संघ ने नौकरी सुरक्षा और उचित मुआवजे की मांग की है।
Advertisement
In-Article Ad
हिमाचल प्रदेश में आउटसोर्स कर्मियों की स्थिति को लेकर मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने गंभीरता दिखाई है। कर्मचारी संघ ने बताया कि प्रदेश में बड़ी संख्या में आउटसोर्स कर्मी 15 से 20 वर्षों से विभिन्न विभागों में काम कर रहे हैं, लेकिन उन्हें केवल 10 से 12 हजार रुपये मासिक वेतन मिल रहा है। कई कर्मियों ने ड्यूटी के दौरान अपनी जान गंवाई है और कुछ दुर्घटनाओं में दिव्यांग हो गए हैं। इन कर्मियों के भविष्य की सुरक्षा और उनके परिवारों के लिए कोई ठोस सहारा नहीं है। इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री कार्यालय ने इसे कार्मिक विभाग को भेज दिया है, जहां नीति निर्माण की प्रक्रिया शुरू की गई है। सरकार ने आउटसोर्स कर्मचारियों की सेवा शर्तों की समीक्षा करने का निर्णय लिया है। संघ ने नौकरी की सुरक्षा, न्यूनतम वेतन, और सेवा के दौरान मृत्यु पर परिजनों को सरकारी नौकरी और उचित मुआवजा देने की मांग की है।
Advertisement
In-Article Ad
इस नीति के लागू होने से आउटसोर्स कर्मियों को बेहतर वेतन और नौकरी की सुरक्षा मिल सकती है, जिससे उनके जीवन स्तर में सुधार होगा।
Advertisement
In-Article Ad
Reader Poll
क्या आपको लगता है कि आउटसोर्स कर्मियों के लिए नई नीति बनानी चाहिए?
Connecting to poll...
मूल लेख पढ़ें
पूरी कहानी के लिए मूल स्रोत पर जाएं।


-1777678506347.webp&w=1200&q=75)

