हिमाचल हाईकोर्ट ने भर्ती नियमों के उल्लंघन पर नियुक्तियों को खारिज किया
Himachal: हाईकोर्ट ने कहा- भर्ती एवं पदोन्नति नियमों के बाहर जाकर नियुक्ति का आदेश नहीं दिया जा सकता
Amar Ujala
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हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने भर्ती और पदोन्नति नियमों का उल्लंघन कर की गई नियुक्तियों को अवैध करार दिया है। याचिकाकर्ताओं ने दावा किया कि उन्हें योग्य होते हुए भी नियुक्तियों से वंचित रखा गया। अदालत ने याचिकाओं को खारिज करते हुए कहा कि चयनित उम्मीदवारों को पक्षकार नहीं बनाया गया था।
- 01हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने भर्ती नियमों के उल्लंघन पर नियुक्तियों को खारिज किया।
- 02याचिकाकर्ता शारीरिक शिक्षा डिप्लोमा धारक थे और उन्हें नियुक्तियों से वंचित रखा गया।
- 03अदालत ने कहा कि याचिकाओं में चयनित उम्मीदवारों को पक्षकार नहीं बनाया गया था।
- 04राज्य सरकार ने सीधी भर्ती के कोटे से अधिक नियुक्तियों का दावा किया।
- 05याचिकाकर्ताओं ने वरिष्ठता के आधार पर नियुक्ति की मांग की थी।
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हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने भर्ती और पदोन्नति नियमों के उल्लंघन के मामले में याचिकाकर्ताओं की नियुक्तियों को अवैध करार दिया है। याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया था कि उन्हें शारीरिक शिक्षा डिप्लोमा धारक के पद के लिए योग्य होते हुए भी नियुक्तियों से वंचित रखा गया। अदालत ने कहा कि याचिकाओं में चयनित उम्मीदवारों को पक्षकार नहीं बनाया गया था, जिससे याचिकाएं खारिज कर दी गईं। राज्य सरकार ने बताया कि शारीरिक शिक्षा प्रवक्ताओं की कुल कैडर संख्या 1527 है, जिसमें से 382 पद सीधी भर्ती द्वारा और 1145 पद पदोन्नति के माध्यम से भरे जाने हैं। याचिकाकर्ताओं ने 2000 से 2008 और 2013 के बीच डिप्लोमा प्राप्त किया था, लेकिन उन्हें नियुक्तियों का अवसर नहीं दिया गया। अदालत ने यह भी कहा कि कानूनन किसी भी व्यक्ति के विरुद्ध उसकी अनुपस्थिति में आदेश पारित नहीं किया जा सकता।
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इस निर्णय से उन योग्य उम्मीदवारों को नुकसान होगा जो भर्ती प्रक्रिया में भाग लेने से वंचित रह गए हैं।
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