दिल्ली सरकार ने जल-सीवर शुल्क में दी राहत, नई नीति लागू
CM रेखा गुप्ता सरकार का बड़ा फैसला, जल-सीवर शुल्क में मिलेगी राहत; नई नीति लागू

Image: Zee News
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने जल और सीवर शुल्क में बड़े बदलावों की घोषणा की है। नई नीति के तहत शुल्क अब पानी की वास्तविक आवश्यकता के आधार पर तय होगा, जिससे नागरिकों और संस्थानों को राहत मिलेगी। धार्मिक स्थलों और जीरो लिक्विड डिस्चार्ज संपत्तियों को 50% छूट मिलेगी।
- 01नई नीति के तहत, जल शुल्क अब पानी की वास्तविक आवश्यकता के आधार पर तय किया जाएगा।
- 02धार्मिक स्थलों और रजिस्टर्ड संस्थानों को जल और सीवर शुल्क पर 50% छूट मिलेगी।
- 03इंफ्रास्ट्रक्चर शुल्क की दरें A और B श्रेणी की कॉलोनियों में लगभग ₹5.4 लाख तक घटेंगी।
- 04ZLD प्रणाली चलाने वाली संपत्तियों को भी 50% तक की छूट मिलेगी, लेकिन यदि प्रणाली निष्क्रिय पाई गई तो जुर्माना लगेगा।
- 05अनधिकृत कॉलोनियों में स्वीकृत नक़्शों को मान्यता दी जाएगी, जिससे प्रक्रियाएं सरल होंगी।
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दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने जल और सीवर शुल्क में महत्वपूर्ण बदलावों की घोषणा की है। नई नीति के अनुसार, शुल्क अब पानी की वास्तविक आवश्यकता के आधार पर निर्धारित किया जाएगा, जिससे नागरिकों और संस्थानों को राहत मिलेगी। पहले, शुल्क पूरे परिसर के आधार पर लिया जाता था, लेकिन अब इसे अधिक पारदर्शी और तर्कसंगत बनाया गया है। धार्मिक स्थलों और आयकर अधिनियम की धारा 12AB के तहत रजिस्टर्ड संस्थानों को जल और सीवर शुल्क पर 50% की छूट दी जाएगी। इसके अलावा, जीरो लिक्विड डिस्चार्ज (ZLD) प्रणाली चलाने वाली संपत्तियों को भी 50% तक की राहत मिलेगी। यदि ZLD प्रणाली खराब पाई गई, तो छूट रद्द कर दी जाएगी और प्रतिदिन 0.5% का जुर्माना लगाया जाएगा। नई नीति के तहत, A और B श्रेणी की कॉलोनियों में चार-मंजिला संपत्तियों का शुल्क ₹5.4 लाख होगा, जबकि E और F श्रेणी की कॉलोनियों में यह लगभग ₹2.7 लाख तक सीमित होगा। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि गैर-FAR क्षेत्रों को शुल्क की गणना से बाहर रखा जाएगा।
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नई नीति के तहत जल और सीवर शुल्क में कमी से दिल्ली के नागरिकों को वित्तीय राहत मिलेगी, जिससे उनका आर्थिक बोझ कम होगा।
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