मेरठ में अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप
60 गज के मदरसे में 5500 छात्र दिखाकर ली छात्रवृत्ति, DM के फर्जी हस्ताक्षरों से सरकारी जमीन की वक्फ बोर्ड के नाम

Image: Jagran
मेरठ में जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी शेषनाथ पांडेय पर करोड़ों की सरकारी जमीन को वक्फ बोर्ड के नाम करने और फर्जी मदरसों की मान्यता देने के आरोप लगे हैं। जांच में यह साबित हुआ है कि पांडेय ने 60 गज के मदरसे में 5500 छात्रों का फर्जी आंकड़ा पेश किया। इस मामले में संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।
- 01शेषनाथ पांडेय ने घोसीपुर गांव की करोड़ों की सरकारी जमीन को फर्जी हस्ताक्षरों से वक्फ बोर्ड के नाम कर दिया।
- 02जांच में पाया गया कि 60 से अधिक मदरसों में से केवल 8 से 10 ही सक्रिय थे।
- 03किठौर के एक मदरसे में 5500 छात्रों का फर्जी आंकड़ा पेश किया गया।
- 04वर्तमान जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी रुहेल आजम को भी निलंबित किया गया है।
- 05जांच में यह भी सामने आया कि अल्पसंख्यक समुदाय के अन्य धर्मों के छात्रों को लाभ नहीं दिया गया।
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मेरठ में जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी शेषनाथ पांडेय पर गंभीर आरोप लगे हैं कि उन्होंने करोड़ों की सरकारी जमीन को वक्फ बोर्ड के नाम करने के लिए फर्जी हस्ताक्षर किए। जांच में यह भी सामने आया है कि पांडेय ने 60 गज के मदरसे में 5500 छात्रों का फर्जी आंकड़ा पेश किया, जबकि वास्तविकता में केवल 8 से 10 मदरसे ही सक्रिय थे। इस मामले की जांच आर्थिक अपराध शाखा के सीओ जितेंद्र कालरा कर रहे हैं। पांडेय को भाजपा सरकार आने के बाद निलंबित किया गया था। इसके अलावा, वर्तमान जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी रुहेल आजम को भी निलंबित किया गया है, जिन्होंने जांच में बाधा डालने का प्रयास किया। विनोद कुमार, जो विश्व हिंदू महासंघ के राष्ट्रीय मंत्री हैं, ने इस मामले की शिकायत की थी। जांच में यह साबित हुआ है कि पांडेय ने मुस्लिम छात्रों को लाभ पहुंचाने के लिए अन्य धर्मों के छात्रों के फंड का दुरुपयोग किया।
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इस मामले से अल्पसंख्यक समुदाय के छात्रों की छात्रवृत्ति और सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता प्रभावित हो सकती है।
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